रिहंद डैम में छोटी मछलियों के कथित शिकार से मचा हड़कंप
सोनभद्र। जनपद सोनभद्र स्थित रिहंद डैम (गोविंद बल्लभ पंत सागर) में मत्स्य आखेट के नाम पर छोटी मछलियों के कथित बड़े पैमाने पर शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। बीजपुर थाना क्षेत्र के बारां नदी एवं सिरसोती इलाके में 10 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक की छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने और बड़े बाजारों में बेचने का आरोप लगाया गया है
7:40 PM, Oct 9, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Anil Kumar agrahari

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रोजाना लाखों मछली के बच्चों के मारे जाने का आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने उठाई आवाज, ठेकेदारों से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच और टेंडर निरस्त करने की मांग
डाला/सोनभद्र। जनपद सोनभद्र स्थित रिहंद डैम (गोविंद बल्लभ पंत सागर) में मत्स्य आखेट के नाम पर छोटी मछलियों के कथित बड़े पैमाने पर शिकार का गंभीर मामला सामने आया है। बीजपुर थाना क्षेत्र के बारां नदी एवं सिरसोती इलाके में 10 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक की छोटी मछलियों को पकड़कर सुखाने और बड़े बाजारों में बेचने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि इस गतिविधि के कारण प्रतिदिन लाखों की संख्या में मछली के बच्चे मारे जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह रिहंद जलाशय के मत्स्य संसाधनों के भविष्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
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इस मामले को लेकर निषाद पार्टी के सोनभद्र जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने मत्स्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मत्स्य आखेट की निविदा में निर्धारित आकार से छोटी मछलियों को पकड़ने पर प्रतिबंध है, तो कथित रूप से उनका शिकार किसके संरक्षण में हो रहा है? शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के आरोपों पर विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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जानकारी के अनुसार, रिहंद डैम में मत्स्य आखेट के लिए जारी निविदा की शर्तों में मछलियों के आकार को लेकर प्रतिबंध निर्धारित होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन शर्तों के विपरीत डेढ़ किलोग्राम से कम वजन की मछलियों का भी शिकार किया जा रहा है। हालांकि, इस प्रतिबंध की वास्तविक शर्तों और लागू नियमों की पुष्टि प्रमाणित है। यदि 10 ग्राम से 500 ग्राम तक की छोटी मछलियां नियमित रूप से पकड़ी जा रही हैं, तो यह जांच का गंभीर विषय है। छोटी मछलियों के बड़े पैमाने पर शिकार से उनके प्रजनन चक्र, भविष्य के मत्स्य उत्पादन और जलाशय के पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निषाद पार्टी जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने मामले में कथित विभागीय मिलीभगत की आशंका जताते हुए संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि निविदा की शर्तों का उल्लंघन और जिम्मेदार लोगों की संलिप्तता प्रमाणित है, दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, गंभीर उल्लंघन पर ठेका निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाए। इस मामले में सहायक निदेशक मत्स्य (ADF) शुभम कश्यप और वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक विकास दीपांकर की विभागीय जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए गए
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित क्षेत्र में छोटी मछलियों के अवैध शिकार की शिकायतें की गई हैं, तो अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या मत्स्य विभाग ने मौके पर निरीक्षण किया? क्या पकड़ी गई मछलियों के नमूनों का परीक्षण, वजन का सत्यापन और परिवहन एवं बिक्री से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई? यदि कार्रवाई हुई है, तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
अनिकेत निषाद ने जिलाधिकारी सोनभद्र एवं मत्स्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि बारां नदी और सिरसोती क्षेत्र का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। संबंधित ठेकेदारों के निविदा दस्तावेजों, मत्स्य आखेट की अनुमति, मछलियों के निर्धारित आकार संबंधी शर्तों तथा मौके पर पकड़ी जा रही मछलियों के नमूनों की जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए और ठेका निरस्त करने पर निर्णय लिया जाए।






