अद्भुत प्रतिभा, 28 सेकंड में हल कर दिया था 13 अंकों का गुणा- जाने कौन है वो ?
शकुंतला देवी का, जिन्हें पूरी दुनिया 'मानव कंप्यूटर' के नाम से जानती है। उनकी गणना करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
sonebhadra
10:01 AM, Nov 4, 2026
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Edited By: U. Gupta , Reported By: यू .गुप्ता

शकुंतला देवी का, जिन्हें पूरी दुनिया 'मानव कंप्यूटर' के नाम से जानती है। उनकी गणना करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
भारत की धरती ने ऐसी अनेक विलक्षण प्रतिभाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी असाधारण क्षमता से पूरी दुनिया को हैरान किया। इन्हीं में एक नाम है शकुंतला देवी का, जिन्हें पूरी दुनिया 'मानव कंप्यूटर' के नाम से जानती है। उनकी गणना करने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। वह बिना कैलकुलेटर और कंप्यूटर की मदद के पलक झपकते ही गणित के कठिन सवालों का जवाब दे देती थीं।
शकुंतला देवी का जन्म 4 नवंबर 1929 को कर्नाटक के बेंगलुरु में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम सी.वी.सुंदरराज राव था, जो सर्कस में कलाकार के रूप में काम करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी कारण शकुंतला देवी को नियमित औपचारिक शिक्षा भी नहीं मिल सकी। उनकी असाधारण गणितीय प्रतिभा का पता महज तीन वर्ष की उम्र में चला, जब उनके पिता उनके साथ ताश के पत्तों का खेल खेल रहे थे। छोटी उम्र में ही उनकी याददाश्त और संख्याओं को समझने की क्षमता देखकर उनके पिता आश्चर्यचकित रह गए। इसके बाद उनके पिता ने उनकी प्रतिभा को लोगों के सामने प्रस्तुत करना शुरू किया।
शकुंतला देवी ने महज छह वर्ष की उम्र में मैसूर विश्वविद्यालय में अपनी गणना क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके बाद अन्नामलाई विश्वविद्यालय सहित कई शिक्षण संस्थानों में उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। धीरे-धीरे उनकी ख्याति देश की सीमाओं से निकलकर विदेशों तक पहुंच गई। वह कई देशों में जाकर गणितीय गणनाओं का प्रदर्शन करने लगीं। 18 जून 1980 को लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में शकुंतला देवी ने दो 13 अंकों की संख्याओं का गुणनफल महज 28 सेकंड में निकालकर दुनिया को चौंका दिया। उनकी इस असाधारण उपलब्धि को वर्ष 1982 के गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला। वर्ष 1977 में उन्होंने मानसिक रूप से 201 अंकों की संख्या का 23वां मूल निकालकर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था।
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शकुंतला देवी केवल गणितीय प्रतिभा की धनी ही नहीं थीं, बल्कि एक कुशल लेखिका भी थीं। उन्होंने गणित को सरल और रोचक बनाने के लिए कई पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में 'फन विद नंबर्स', 'पजल्स टू पजल यू', 'फिगरिंग: द जॉय ऑफ नंबर्स' और 'मैथैबिलिटी' शामिल हैं। उन्होंने गणित के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाने और इस विषय के डर को दूर करने का प्रयास किया।
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शकुंतला देवी का विवाह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी परितोष बनर्जी से हुआ था। उनकी एक बेटी अनुपमा बनर्जी हैं। बाद में उनका वैवाहिक जीवन समाप्त हो गया। 21 अप्रैल 2013 को बेंगलुरु में 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। शकुंतला देवी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा किसी डिग्री या संसाधन की मोहताज नहीं होती। सीमित साधनों और औपचारिक शिक्षा के अभाव के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, अभ्यास और असाधारण स्मरण शक्ति के बल पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई। आज भी उनका नाम गणितीय प्रतिभा, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
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सोर्स- सोशल मीडिया






