ब्लॉक प्रमुख म्योरपुर मान सिंह ने किया तालाब निर्माण हेतु भूमिपूजन, किसानों को मिले स्प्रिंकलर सेट : विधान संस्था की विशेष पहल।
पोर्टेबल स्प्रिंकलर सेट के माध्यम से किसानों को वर्षा जैसी सिंचाई की सुविधा मिलती है, जिससे पूरे खेत में समान रूप से पानी पहुंचता है। यह तकनीक कम पानी में अधिक क्षेत्र को सिंचित करने में सक्षम है और विभिन्न फसलों जैसे गेहूं, मक्का, धान एवं सब्जियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
muirpur
12:04 AM, Apr 27, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Prashant Dubey

सोनभद्र जनपद के म्योरपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लीलादेवा में आज विकास और नवाचार की एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। विधान संस्थान द्वारा संचालित परियोजना के तहत तालाब निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया। इसी अवसर पर 20 चयनित प्रगतिशील किसानों को पोर्टेबल स्प्रिंकलर सेट वितरित किए गए, जिससे क्षेत्र में आधुनिक खेती को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानसिंह गोंड (ब्लॉक प्रमुख, म्योरपुर) ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि तालाब निर्माण और आधुनिक सिंचाई उपकरण किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं और इससे खेती को टिकाऊ तथा लाभकारी बनाया जा सकता है।

परियोजना की उपयोगिता पर प्रकाश
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कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रत्यूष त्रिपाठी के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने बताया कि इस तालाब के निर्माण से भू-जल स्तर में सुधार होगा और किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा प्राप्त होगी। साथ ही आधुनिक उपकरणों के उपयोग से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव होगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

उपस्थित गणमान्य लोग
इस अवसर पर कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें मनोज कुमार त्रिपाठी “बाबा”, अनुराग पाठक, प्रमोद मौर्य, आशीष कुमार गुप्ता सोन प्रभात संपादक तथा संस्थान के अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे। सभी ने इस पहल की सराहना की और इसे क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

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स्प्रिंकलर तकनीक से खेती में बदलाव
पोर्टेबल स्प्रिंकलर सेट के माध्यम से किसानों को वर्षा जैसी सिंचाई की सुविधा मिलती है, जिससे पूरे खेत में समान रूप से पानी पहुंचता है। यह तकनीक कम पानी में अधिक क्षेत्र को सिंचित करने में सक्षम है और विभिन्न फसलों जैसे गेहूं, मक्का, धान एवं सब्जियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसके पोर्टेबल होने के कारण इसे आसानी से एक खेत से दूसरे खेत ले जाया जा सकता है, जिससे समय और श्रम की बचत होती है तथा मिट्टी के कटाव को भी रोका जा सकता है।

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ड्रिप इरिगेशन का महत्व
कार्यक्रम में ड्रिप इरिगेशन तकनीक की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। इस प्रणाली के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे 40 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इसके उपयोग से खरपतवार की समस्या कम होती है और खाद तथा पानी एक साथ देने की सुविधा मिलती है। यह तकनीक फल, सब्जी, गन्ना और बागवानी फसलों के लिए विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
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किसानों के लिए लाभकारी पहल
इन आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत में कमी आती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में यह तकनीक खेती को आसान बनाती है और किसानों को कम पानी में अधिक उपज प्राप्त करने में मदद करती है, जिससे खेती लाभदायक और टिकाऊ बनती है।

संस्थान का लक्ष्य और संकल्प
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विधान संस्थान का उद्देश्य है कि सोनभद्र के प्रत्येक गांव तक आधुनिक खेती और जल संरक्षण की तकनीकों को पहुंचाया जाए। संस्थान किसानों को प्रशिक्षण, उपकरण और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

किसानों ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में लाभार्थी किसानों ने इस पहल के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजनाएं उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होंगी और भविष्य में उनकी खेती को अधिक सफल बनाएंगी।






