सराहनीय कार्य:आठ दिन की नन्ही ‘कीर्ति’ को मिला नाम, अब सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी प्रशासन की
सोनभद्र। कभी-कभी किसी को दिया गया एक नाम केवल पहचान नहीं होता, बल्कि नई उम्मीद और नए सफर की शुरुआत भी बन जाता है। दुद्धी क्षेत्र से रेस्क्यू कर राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई में लाई गई महज आठ दिन की नवजात बच्ची के लिए शुक्रवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा। वन स्टॉप सेंटर एवं राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने नवजात का नामकरण करते हुए उसे ‘कीर्ति’ नाम दिय
8:02 PM, Sep 25, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

नन्ही ‘कीर्ति’ के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी प्रशासन ने उठाई, डीएम ने कहा- देखभाल में नहीं रहेगी कोई कमीआठ दिन की नवजात का डीएम ने किया नामकरण, दत्तक ग्रहण इकाई की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देशसिर्फ आश्रय नहीं, बच्चों को अपनापन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य देने पर जोरसोलर सिस्टम, किचन गार्डन और इंटरलॉकिंग की सुविधा से संवरेगा परिसरसोनभद्र। कभी-कभी किसी को दिया गया एक नाम केवल पहचान नहीं होता, बल्कि नई उम्मीद और नए सफर की शुरुआत भी बन जाता है। दुद्धी क्षेत्र से रेस्क्यू कर राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई में लाई गई महज आठ दिन की नवजात बच्ची के लिए शुक्रवार का दिन भी कुछ ऐसा ही रहा। वन स्टॉप सेंटर एवं राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण इकाई के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने नवजात का नामकरण करते हुए उसे ‘कीर्ति’ नाम दिया।नन्ही बच्ची को मिली नई पहचान के दौरान माहौल भावुक हो उठा। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों की देखभाल में किसी भी स्तर पर कमी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन का उद्देश्य केवल संरक्षण और आश्रय उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, अपनापन, स्नेह और बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराना है।शुक्रवार को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने वन स्टॉप सेंटर और दत्तक ग्रहण इकाई का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी भी मौजूद रहीं। दत्तक ग्रहण इकाई में वर्तमान में दो नवजात बच्चे आवासित मिले। इनमें गौरी जनवरी 2026 से इकाई में रह रही है, जबकि दुद्धी क्षेत्र से करीब छह दिन पूर्व रेस्क्यू की गई लगभग आठ दिन की नवजात बच्ची को भी यहां लाया गया है।बच्चों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकतानिरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों की जरूरतों और सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों को केवल छत उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित माहौल, देखभाल, सम्मान और अपनत्व का अनुभव भी मिलना चाहिए।उन्होंने दत्तक ग्रहण इकाई की व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए बच्चों की देखभाल, स्वच्छता, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।सोलर सिस्टम और किचन गार्डन से संवरेगा परिसरनन्ही ‘कीर्ति’ समेत यहां रह रहे बच्चों के लिए परिसर को और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी प्रशासन ने कदम बढ़ाए हैं। जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने भवन में सोलर सिस्टम, किचन गार्डन तथा परिसर में इंटरलॉकिंग का कार्य सीएसआर के माध्यम से कराने के निर्देश दिए।वहीं कार्यदायी संस्था डूडा को भवन की आवश्यक मरम्मत और अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए, ताकि बच्चों के साथ-साथ वन स्टॉप सेंटर में आने वाली महिलाओं को भी सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।शिफ्टवार ड्यूटी पर तैनात हैं कर्मचारीनिरीक्षण के दौरान परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। वन स्टॉप सेंटर में केंद्र प्रशासक सहित कुल 12 कार्मिक कार्यरत हैं। इनमें सात कर्मचारी मौके पर उपस्थित मिले, जबकि अन्य शिफ्टवार ड्यूटी पर तैनात बताए गए।दत्तक ग्रहण इकाई में अधीक्षिका सहित कुल 10 कार्मिक कार्यरत हैं। निरीक्षण के दौरान चार कर्मचारी मौके पर मौजूद मिले और शेष शिफ्टवार ड्यूटी कर रहे थे। पुलिस विभाग की ओर से एक महिला आरक्षी की भी तैनाती है।नामकरण से मिली नई पहचाननन्ही ‘कीर्ति’ का नामकरण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित और बेहतर भविष्य की दिशा में उठाया गया संवेदनशील कदम माना जा रहा है। प्रशासन की इस पहल से यह संदेश भी सामने आया कि संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों को केवल आश्रय नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्नेह, सम्मान और बेहतर बचपन उपलब्ध कराना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।इस अवसर पर प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह भदौरिया, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर शर्मा, अपर जिला सूचना अधिकारी विनय कुमार सिंह, वन स्टॉप सेंटर प्रशासक दीपिका सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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