भगवान राम के अवतार, शिव महिमा और माता पार्वती की तपस्या का किया वर्णन
डाला (सोनभद्र)। नगर क्षेत्र स्थित श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के स्थापना दिवस पर आयोजित पांच दिवसीय मानस प्रवचन के दूसरे दिन बुधवार को भगवान राम के धरती पर अवतार लेने, भगवान शिव की महिमा और माता पार्वती की तपस्या का वर्णन किया गया। व्यासपीठ से संत श्रीश रामानुज वैष्णव दास ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से भगवान की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे
6:51 PM, Oct 15, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Anil kumar agrahari

अचलेश्वर महादेव मंदिर के स्थापना दिवस पर आयोजित मानस प्रवचन में कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता
डाला (सोनभद्र)। नगर क्षेत्र स्थित श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के स्थापना दिवस पर आयोजित पांच दिवसीय मानस प्रवचन के दूसरे दिन बुधवार को भगवान राम के धरती पर अवतार लेने, भगवान शिव की महिमा और माता पार्वती की तपस्या का वर्णन किया गया। व्यासपीठ से संत श्रीश रामानुज वैष्णव दास ने रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से भगवान की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।मानस प्रवचन का शुभारंभ मंदिर के महंत मुरली तिवारी ने राम दरबार की आरती उतारकर किया। इसके बाद कथावाचक ने भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद का वर्णन करते हुए बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया कि भगवान राम कौन हैं और उन्होंने मनुष्य रूप में पृथ्वी पर अवतार क्यों लिया।इस पर भगवान शिव ने माता उमा को भगवान राम के अवतार के विभिन्न कारणों के बारे में बताया। कथावाचक ने कहा कि भगवान के अवतार का एक कारण संत कुमारों के श्राप से भगवान के पार्षदों का राक्षस योनि में जन्म लेना था। उनके उद्धार के लिए भगवान को पृथ्वी पर अवतार लेना पड़ा। दूसरा कारण जलंधर की कथा से जुड़ा है, जिसमें वृंदा के श्राप के कारण भगवान को मनुष्य रूप में जन्म लेने का विधान हुआ। तीसरा कारण नारद जी का श्राप और चौथा कारण मनु-शतरूपा को दिया गया भगवान का वह वरदान था, जिसके अनुसार प्रभु ने उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का वचन दिया था।संत श्रीश रामानुज वैष्णव दास ने कहा कि भगवान के अवतार लेने के अनेक कारण होते हैं, लेकिन मुख्य उद्देश्य अपने भक्तों का कल्याण करना होता है। भगवान पृथ्वी पर अवतार लेकर विभिन्न लीलाएं करते हैं, जिनका गुणगान और श्रवण करने से भक्तों को भवसागर से पार होने का मार्ग मिलता है।गृहस्थ आश्रम में रहकर भी भगवान को प्राप्त किया जा सकता हैकथावाचक ने गृहस्थ आश्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी भगवान की भक्ति और उनकी प्राप्ति संभव है। भगवान शिव इसका श्रेष्ठ उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के परिवार में अलग-अलग स्वभाव वाले सदस्यों के बावजूद प्रेम, सामंजस्य और सुख का वातावरण बना रहता है। इसका श्रेय परिवार के मुखिया भगवान भोलेनाथ के उदार और कल्याणकारी स्वभाव को जाता है। प्रत्येक परिवार के मुखिया को भगवान शिव के आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए।उन्होंने भगवान शिव को औघड़दानी बताते हुए कहा कि उनके जैसा दानी न कोई हुआ है और न होगा। उनकी कृपा से कैलाश पर सदैव आनंद और उल्लास का वातावरण रहता है। आत्मा अजर-अमर है और भगवान की भक्ति जीवन को सार्थक बनाती है। उन्होंने कहा कि जब सृष्टि का संतुलन बिगड़ता है, तब भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों के कल्याण के लिए अवतार लेते हैं।मानस प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर मानस परिवार समिति के अध्यक्ष नीरज पाठक, राजीव कुमार, मंगल जायसवाल, धीरेंद्र प्रताप सिंह, संतोष शर्मा, राजू तिवारी, अर्जुन सिंह सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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