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घोरावल की रामलीला में सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध का भावुक मंचन, दर्शकों की आंखें हुईं नम

घोरावल (सोनभद्र)। घोरावल नगर में आयोजित श्री रामेश्वर रामलीला में कलाकारों ने सुपर्णखा की नाक कटने, राक्षस मारीच के स्वर्णमृग बनने, सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध का भावपूर्ण मंचन किया। रामलीला के इन दृश्यों को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे

8:44 PM, Oct 15, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

घोरावल की रामलीला में सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध का भावुक मंचन, दर्शकों की आंखें हुईं नम
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क


घोरावल (सोनभद्र)। घोरावल नगर में आयोजित श्री रामेश्वर रामलीला में कलाकारों ने सुपर्णखा की नाक कटने, राक्षस मारीच के स्वर्णमृग बनने, सीता हरण और जटायु-रावण युद्ध का भावपूर्ण मंचन किया। रामलीला के इन दृश्यों को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे।रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण कुटिया के बाहर वार्तालाप कर रहे हैं। इसी बीच कुटिया के पास स्वर्णमृग दिखाई देता है, जिसे देखकर माता सीता मोहित हो जाती हैं। वह श्रीराम से स्वर्णमृग लाने की इच्छा व्यक्त करती हैं। पहले श्रीराम उन्हें समझाते हैं, लेकिन सीता की जिद के बाद वह धनुष-बाण लेकर स्वर्णमृग का पीछा करने निकल पड़ते हैं।घने जंगल में श्रीराम के बाण से घायल होने पर स्वर्णमृग के रूप में छिपा राक्षस मारीच अपने वास्तविक रूप में आ जाता है और माया रचते हुए 'हे लक्ष्मण! हे लक्ष्मण!' की पुकार लगाता है। श्रीराम की आवाज सुनकर माता सीता चिंतित हो जाती हैं और लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेज देती हैं। जाने से पहले लक्ष्मण कुटिया के चारों ओर रेखा खींचकर माता सीता को उसके बाहर न निकलने की हिदायत देते हैं।लक्ष्मण के जाते ही रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया के पास पहुंचता है और माता सीता से भिक्षा मांगता है। वह उन्हें लक्ष्मण रेखा के बाहर आकर भिक्षा देने के लिए कहता है। जैसे ही माता सीता रेखा पार करती हैं, रावण उनका हरण कर पुष्पक विमान से लंका की ओर चल पड़ता है। रास्ते में माता सीता अपने आभूषण गिराती जाती हैं, ताकि श्रीराम को उनके मार्ग का पता चल सके।इसी दौरान गिद्धराज जटायु माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए उससे युद्ध करते हैं। हालांकि, रावण के साथ संघर्ष में जटायु बुरी तरह घायल होकर धरती पर गिर पड़ते हैं। उधर, कुटिया लौटने पर माता सीता को न पाकर श्रीराम और लक्ष्मण व्याकुल हो उठते हैं तथा उनकी खोज में निकल पड़ते हैं। मार्ग में घायल जटायु उन्हें सीता हरण की पूरी घटना बताते हैं।सीता हरण और जटायु के बलिदान का मार्मिक दृश्य देखकर रामलीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को रामायण के प्रसंग से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार 'किसानू', महंत सुरेश चौधरी, रामचंदर गिरी, विजय, पारस मोदनवाल, टिंकू अग्रहरि, मेकअप मास्टर अर्जुन सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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