पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर भव्य काव्य संध्या
सोनभद्र)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार की रात कस्बा स्थित होटल ग्रीन स्टार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच के तत्वावधान में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। देर रात शुरू हुई काव्य की रसधार प्रातः भोर तक चलती रही। देश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
6:15 AM, Sep 27, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

देशभर से जुटे कवियों ने बांधा समां, भोर तक चली काव्य की रसधारदुद्धी (सोनभद्र)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुक्रवार की रात कस्बा स्थित होटल ग्रीन स्टार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच के तत्वावधान में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। देर रात शुरू हुई काव्य की रसधार प्रातः भोर तक चलती रही। देश के विभिन्न अंचलों से पहुंचे कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पं. दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने मां सरस्वती एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद वंदे मातरम्, सरस्वती वंदना सहित विभिन्न सांस्कृतिक एवं संगीत प्रस्तुतियां प्रसाद कुंवर पब्लिक स्कूल के कलाकारों ने दीं। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भक्तिमय और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत वातावरण बना दिया।अतिथियों के माल्यार्पण एवं अंगवस्त्रम से स्वागत के उपरांत डॉ. वीर अभिमन्यु (मनु जी) ने वायलिन वादन के माध्यम से भज गोविंदम् सहित विभिन्न प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. लवकुश प्रजापति ने की, जबकि संचालन जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी ने किया।एकात्म मानववाद और अंत्योदय पर हुआ विमर्शकार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में 'विश्व वैदिक सनातन न्याय भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह तथा डॉ. सुमन राव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय की अवधारणा की चर्चा करते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान को लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके विचारों और जीवन दर्शन को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताते हुए वक्ताओं ने उनके चिंतन को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।कवियों ने देर रात तक जमाया रंगकाव्य संध्या में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे प्रख्यात कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं।आदित्य नायक ने "सवेरे ही तुम्हें एहसास होगा ये, तुम्हारे पास मौका रात भर का था" जैसी पंक्तियों के माध्यम से श्रोताओं को चिंतन के लिए प्रेरित किया।हिमांशु सिंह सनातनी ने "महामाया के पावन बगिया, राष्ट्र धर्म की रीत लिखी है, दीनदयाल के अंत्योदय से भारत की हर जीत लिखी है" पंक्तियों के माध्यम से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को स्वर दिया।आकाश आगम ने "इतनी सी अरदास की बाबा, ग्रहण न आए उसके हिस्से, हमें अमावस्या देकर आया जिसके हिस्से चांद हमारा" सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।अमर भगोरिया की पंक्तियां "यह तो तोहीन-ए-इश्क है जाना, तेरे होते हुए खुदा देखूं" श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर गईं।वैभव अवस्थी ने "100 करोड़ हिंदू हैं लेकिन हिंदुस्तान नहीं दिखता" जैसी पंक्तियों के माध्यम से सामाजिक यथार्थ पर अपनी बात रखी।यथार्थ विष्णु ने पिता के प्रेम को समर्पित पंक्तियां—"उपमा कोई बाप के प्यार की, बाप का प्यार हर प्यार का बाप है"—सुनाकर भावुक वातावरण बना दिया।कौशल्या कुमारी चौहान ने "जय हिंद, वंदे मातरम् का जो करते सम्मान नहीं, वे भारत माता के दुश्मन उनका हिंदुस्तान नहीं" के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया।भोजपुरी कवि डॉ. नंद जी नंदा (बलिया) ने "एकता, अखंडता, उत्थान चाहिए, न्याय चाहिए तो संविधान चाहिए" के माध्यम से एकता और न्याय का आह्वान किया।सूर्यकांत जायसवाल ने "होली में अली बसे, राम बसे रमजान, ऐसा है मेरा हिंदुस्तान, ऐसा है मेरा हिंदुस्तान" सुनाकर सामाजिक एवं सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया।धर्मराज ठाकुर ने "देखते-देखते कथा से कथा हो गया, जो गुनहगार था देखा ही गया" जैसी पंक्तियों के माध्यम से जीवन दर्शन प्रस्तुत किया।इसके अलावा डॉ. लखन राम जंगली ने "नेतन के लागल बाजार, वोट के के देबो नन दो" तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. लवकुश प्रजापति ने "सोशल मीडिया पर घुटन हो रही, प्रीत तुम बस एक पाती लिखना" जैसी रचनाओं का पाठ किया।राष्ट्रीय जागरण पर दिया जोरमुख्य अतिथि पं. दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने काव्य संध्या की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए ऐसे आयोजनों को राष्ट्रीय जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवाओं और नवांकुर कवियों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया तथा राष्ट्र और समाज के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि सहित सभी आमंत्रित कवियों और अतिथियों का अंगवस्त्रम, माल्यार्पण, बैज अलंकरण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।आयोजन की सफलता में इनकी रही प्रमुख भूमिकाकार्यक्रम को सफल बनाने में विचार मंच के संरक्षक रामेश्वर राय, मनोज सिंह (बबलू), उपाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, एडवोकेट नंदलाल अग्रहरि, नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, महामंत्री जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी, मंत्री विंध्यावासिनी प्रसाद गुप्त, कोषाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार गुप्ता, डॉ. केके चौरसिया, डॉ. राजबहादुर, निरंजन जायसवाल, अजय धनेन्द्र जायसवाल सहित विचार मंच के पदाधिकारियों एवं क्षेत्र के प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक रविंद्र कुमार जायसवाल, दुद्धी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण पांडे एडवोकेट, भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक शाह तथा नगर संघ चालक अमरनाथ जायसवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।कार्यक्रम का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच के महामंत्री जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी ने किया। देर रात से भोर तक चले इस आयोजन में श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया और तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
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