आरईसी सोनभद्र के शोध प्रोजेक्ट को 16.08 लाख रुपये का अनुदान, ड्रोन-रोबोट से होगी एक्वाकल्चर की स्मार्ट निगरानी
चुर्क सोनभद्र। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत पाण्डेय के नेतृत्व में प्रस्तावित महत्वपूर्ण शोध परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CST-UP) द्वारा 16.08 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है
7:14 AM, Aug 18, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Sanjay singh

चुर्क सोनभद्र। राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत पाण्डेय के नेतृत्व में प्रस्तावित महत्वपूर्ण शोध परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CST-UP) द्वारा 16.08 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीन वर्ष की अवधि वाली इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से बड़े पैमाने पर होने वाले मत्स्य पालन (एक्वाकल्चर) की निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। एक्वाकल्चर में पानी में घुली ऑक्सीजन, पीएच मान, मटमैलापन और अमोनिया जैसे मानकों में तेजी से बदलाव हो सकता है। पानी की गुणवत्ता में मामूली उतार-चढ़ाव भी मछलियों में तनाव, बीमारी और बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बन सकता है, जिससे मत्स्य पालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।परंपरागत निगरानी प्रणालियां कई बार महंगी और श्रमसाध्य होने के साथ-साथ पानी की अलग-अलग गहराइयों में प्रदूषण एवं जल गुणवत्ता का सटीक आकलन करने में सीमित साबित होती हैं। इसी चुनौती को देखते हुए डॉ. प्रशांत पाण्डेय और उनकी टीम द्वारा एक अत्याधुनिक स्वचालित निगरानी प्रणाली विकसित की जा रही है।
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परियोजना में सह-अन्वेषक के रूप में आरईसी सोनभद्र के डॉ. आशीष रंजन मिश्रा, आईआईआईटीडीएम कुरनूल के डॉ. विनय कुमार तिवारी तथा एमएमएमयूटी गोरखपुर के डॉ. रवि प्रकाश त्रिपाठी शामिल हैं।
*तीन चरणों में काम करेगी प्रणाली*
प्रस्तावित प्रणाली में सबसे पहले एक हवाई ड्रोन बड़े तालाबों और जलाशयों की सतह का तेजी से निरीक्षण करेगा। ड्रोन के माध्यम से सतह पर होने वाले असामान्य बदलावों की पहचान की जाएगी। किसी संभावित गड़बड़ी का संकेत मिलने पर एक छोटे अंडरवाटर रोबोट (सबमर्सिबल रोबोट) को पानी में उतारा जाएगा।
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यह रोबोट पानी की विभिन्न गहराइयों और परतों में जाकर जल गुणवत्ता से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाएगा। इसके आधार पर पानी में प्रदूषण के प्रसार और जल गुणवत्ता की स्थिति का अधिक सटीक मानचित्र तैयार किया जा सकेगा परियोजना की प्रमुख विशेषता FPGA आधारित एज-कंप्यूटिंग सिस्टम होगी। इसके माध्यम से रोबोट के भीतर ही रियल-टाइम में AI और मशीन लर्निंग मॉडल चलाए जा सकेंगे। इसके लिए हर डेटा को बाहरी क्लाउड सर्वर तक भेजने की आवश्यकता नहीं होगी।
शोध टीम के अनुसार, इससे डेटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी, ऊर्जा की खपत कम होगी और अंडरवाटर रोबोट लंबे समय तक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा। साथ ही जल गुणवत्ता में होने वाले संभावित खतरनाक बदलावों की समय रहते पहचान करने में मदद मिलेगी।
संस्थान के निदेशक और विभागाध्यक्ष का जताया आभार
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इस उपलब्धि पर शोध टीम ने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र के निदेशक प्रो. के. एस. वर्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. डी. के. त्रिपाठी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रो. के. एस. वर्मा और प्रो. डी. के. त्रिपाठी के निरंतर मार्गदर्शन, प्रशासनिक सहयोग और शोध-अनुकूल वातावरण के कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने में सफलता मिली है। यह शोध परियोजना उत्तर प्रदेश में तकनीक आधारित मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और जल गुणवत्ता की स्मार्ट निगरानी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।






