यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आखिर कब होंगे चुनाव?
नवंबर 2026 तक चुनाव कराना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगा जवाब.
lucknow
2:01 PM, Aug 6, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: News Desk

Photo : Sonprabhat News
लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कड़ा जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिसूचना जारी होने के बाद छह महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराना सरकार की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसकी समय-सीमा नवंबर 2026 में पूरी हो रही है।
लखनऊ खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि भविष्य में पंचायत चुनाव की तैयारियां वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से कम से कम दो वर्ष पहले शुरू कर दी जानी चाहिए, ताकि समय पर चुनाव संपन्न कराए जा सकें।
सरकार से पूछा- देरी की वजह क्या है?
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि सरकार मई 2025 से चुनाव प्रक्रिया शुरू होने का दावा कर रही है, तो अब तक चुनाव क्यों नहीं कराए गए। अदालत यह जानना चाहती है कि देरी सरकार के नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों के कारण हुई या फिर संवैधानिक दायित्व निभाने में लापरवाही हुई।
मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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सरकार ने बताई देरी की वजह
प्रयागराज पीठ में दाखिल अपने जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि पंचायत चुनाव में देरी के पीछे मुख्य रूप से पिछड़ा वर्ग आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन में लगा समय जिम्मेदार रहा। सरकार के अनुसार, इन प्रक्रियाओं के पूरा होने से पहले चुनाव कराना संभव नहीं था।
प्रशासक नियुक्ति पर भी उठे सवाल
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समय पर चुनाव कराना ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां सरकार और याचिकाकर्ताओं के पक्षों पर आगे विचार किया जाएगा।






