अमोघ फल के लिए माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करे जाने.
माँ के इस स्वरूप में एक भुजा अभय देने वाली मुद्रा में और दूसरी भुजा वर देने वाली मुद्रा में रहती है।
sonebhadra
6:20 PM, Oct 15, 2026
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Edited By: U. Gupta , Reported By: यू. गुप्ता

अमोघ फल के लिए माँ कात्यायनी की पूजा कैसे करे जाने.
माँ का यह छठा विग्रह स्वरूप है और माँ कात्यायनी की पूजा-अर्चना भक्त नवरात्र के छठे दिन करते हैं। सुनहरे और चमकीले वर्ण, चार भुजाएं और रत्नाभूषणों से अलंकृत देवी शक्ति का छठा स्वरूप माँ कात्यायनी हैं। इस रूप में माँ खूंखार और झपट पड़ने वाली मुद्रा में सिंह पर सवार हैं। उनका आभामंडल विभिन्न देवों के तेज अंशों से मिश्रित इंद्रधनुषी छटा देता है। प्राणियों में माँ कात्यायनी का वास ‘आज्ञा चक्र’ में होता है। साधक इस दिन इसी चक्र में ध्यान लगाते हैं।
माँ के इस स्वरूप में एक भुजा अभय देने वाली मुद्रा में और दूसरी भुजा वर देने वाली मुद्रा में रहती है। तीसरी भुजा में माँ कात्यायनी ने चंद्रहास खड्ग (तलवार) धारण की है और चौथी भुजा में कमल का फूल धारण किया है। एकाग्रचित्त और पूर्ण समर्पित भाव से माँ की उपासना करने वाला भक्त बड़ी सहजता से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति कर लेता है। माँ कात्यायनी अमोघ फल देकर प्रत्येक क्षेत्र में विजय दिलाती हैं।
पूजा मंत्र--
चंद्रहासोज्ज्वलकरा
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शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं
दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
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कात्यायनी महाभागे महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
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नवरात्र के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ कात्यायनी का ध्यान गोधूलि बेला में किया जाता है। माँ कात्यायनी अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं। मान्यता है कि अविवाहित कन्याएं अगर माँ कात्यायनी की पूजा करती हैं तो विवाह का योग जल्दी बनता है और योग्य वर की प्राप्ति होती है।
मधु यानी शहद का भोग लगाकर माँ कात्यायनी को प्रसन्न किया जा सकता है। इस दिन माँ को प्रसन्न करने के लिए फूल और फल कन्याओं को भेंट करें।






