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श्रीमद भागवत कथा में धर्म संस्कृति की नैतिकता का बोध कराया

श्रीमद भागवत कथा में धर्म संस्कृति की नैतिकता का बोध कराया

8:56 PM, May 17, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

श्रीमद भागवत कथा में धर्म संस्कृति की नैतिकता का बोध कराया
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क



दुद्धी: श्री रामलीला मंच पर श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा वाचक बाल व्यास मानस जी महाराज ने कथा के दौरान भक्तों को श्रवण कराया कि भागवत ज्ञान भक्ति को प्रभावित करते हुए नई चेतना का निर्माण करता है,जो भक्त और भगवान के प्रेम को दर्शाता है।जब व्यक्ति किसी संत के मुखर बिंदु से सत्संग सुधा का पान करता है तब वह भगवान के ममत्व की ओर खींचा चला आता है।एक अच्छी बात है कि भगवान की शरण में रहने वाला व्यक्ति दूसरे के दुःख को अपने दुख के ही सामान समझता है जैसे दुष्ट दुर्योधन की मित्रता में आकर अश्वत्थामा ने द्रोपदी के पांच पांच पुत्रों को मार डाला द्रौपदी अपनी गर्दन कटे हुए पांचों पुत्रों को अंक में भरे हुए अर्जुन के हाथ जोड़ती है,कि आप अश्वत्थामा को मत मारो जितना कष्ट मेरे पांच पुत्रों को मरने से हुआ है उतना कष्ट गुरु द्रोण की पत्नी गुरु माता को अश्वत्थामा के मरने के बाद होगा अतः यह उक्ति दर्शाती है कि सत्संग सिखाता है अपने दुःख से दूसरे के दुःख का अंदाजा लगा लेना चाहिए यह भागवत ज्ञान जीवदया सत्य प्रेम करुणा भाव परोपकार का आश्रयकेंद्र है या यूं कहे तो भगवत ज्ञान ही व्यक्ति का मूल घर है और रहना सबको यही है तो मनुष्य का मनुष्य से वैर कैसा क्योंकि भागवत ज्ञान ने कभी मनुष्यता का विभाजन नहीं किया सदैव सबको एक समान देखा इसी लिए भगवान के लीला अवतार का वर्णन करते हुए व्यास भगवान ने संसार के सबसे गंदे जीव सुकर के रूप में अवतार लेकर के यह प्रमाणित किया कि भगवान कण कण में निहित है।एवं भगवान ने संदेश दिया किसी भी जीव को आहार बनाने से पहले भगवान के बारह अवतार को एक बार स्मरण कर ले शायद इसीलिए दुद्धी श्री रामलीला मैदान भागवत कथा के अंतर्गत बाल व्यास जी ने झोली फैलाकर के पंडाल में उपस्थित लोगो से मांग किया कि जीवों पर दया करना शुरू कर दो , व्यास जी के इस सत्संकल्प में हाथ उठाकर के अपनी अपराध की छमा मांगते हुए मांसाहार छोड़ने का संकल्प लिया कथा पंडाल ने बैठे लोगों ने जयकारे लगाते हुए अभिवादन किया।

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