नवरात्र का सातवां दिन- भय का नाश कर शुभ फल देती हैं माँ कालरात्रि, सप्तमी पर गुड़ का भोग अर्पित करने की मान्यता.
माँ कालरात्रि को अर्पित करें गुड़ का भोग, शुभ फल की प्राप्ति के लिए करें विधि-विधान से पूजा-अर्चना
sonebhadra
4:02 PM, Oct 16, 2026
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Edited By: U. Gupta , Reported By: यू .गुप्ता

माँ कालरात्रि को अर्पित करें गुड़ का भोग, शुभ फल की प्राप्ति के लिए करें विधि-विधान से पूजा-अर्चना
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। माँ कालरात्रि को देवी भगवती का अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप भले ही भयानक हो, लेकिन वे अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं। इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कालरात्रि की आराधना से भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।
माँ कालरात्रि के तीन नेत्र ब्रह्मांड के गोलों के समान हैं और उनके गले में विद्युत के समान चमकने वाली सफेद माला सुशोभित है। उनकी चार भुजाएं हैं तथा उनका वाहन गधा है। माँ के एक हाथ में चंद्रहास खड्ग और दूसरे हाथ में कांटेदार कटार है, जबकि उनके अन्य दो हाथ वर मुद्रा और अभय मुद्रा में रहते हैं। उनका यह स्वरूप बुराई का विनाश करने और भक्तों की रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के सातवें दिन साधक सहस्रार चक्र में ध्यान लगाते हैं। माँ कालरात्रि की उपासना आध्यात्मिक साधना और सिद्धियों की प्राप्ति के लिए विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि उनकी आराधना से साधक को सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। माँ कालरात्रि नकारात्मक एवं आसुरी प्रवृत्तियों का नाश कर भक्तों को निर्भयता का आशीर्वाद देती हैं।
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नवरात्र का सातवां दिन माँ कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माँ को गुड़ अथवा गुड़ से बने पकवानों का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की पूजा कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि माँ की कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। इस दिन कन्याओं को रुमाल और सुगंधित वस्तुएं भेंट करने की भी परंपरा बताई गई है। माँ कालरात्रि का पूजा मंत्र--
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“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥”
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नवरात्र के सातवें दिन माँ कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भक्त उनसे सुख, शांति, समृद्धि और निर्भय जीवन का आशीर्वाद मांगते हैं।






