Operation Conviction: सोनभद्र में अभियुक्त को 10 वर्ष का कारावास, ₹10,500 अर्थदंड
सोनभद्र: अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे Operation Conviction अभियान के तहत सोनभद्र पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रभावी विवेचना, साक्ष्यों के मजबूत संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के परिणामस्वरूप माननीय सत्र न्यायालय, सोनभद्र ने एक अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए कुल 10 वर्ष के कारावास और ₹10,500 के अर्थदंड से दंडित किया है
7:43 PM, Sep 29, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

सोनभद्र, 29 सितंबर 2026। अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे Operation Conviction अभियान के तहत सोनभद्र पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रभावी विवेचना, साक्ष्यों के मजबूत संकलन और अभियोजन पक्ष की प्रभावी न्यायालयीन पैरवी के परिणामस्वरूप माननीय सत्र न्यायालय, सोनभद्र ने एक अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए कुल 10 वर्ष के कारावास और ₹10,500 के अर्थदंड से दंडित किया है।यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ एवं अपर पुलिस महानिदेशक, वाराणसी जोन के निर्देशन, पुलिस उपमहानिरीक्षक, विन्ध्याचल परिक्षेत्र, मिर्जापुर के पर्यवेक्षण तथा पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा के नेतृत्व में की गई।बभनी थाने में दर्ज था मुकदमामामला थाना बभनी में पंजीकृत मु0अ0सं0-92/2024, धारा 105 एवं 115(2) बीएनएस से संबंधित है। इस मामले में अभियुक्त सुख सिंह पुत्र जवाहिर गौड़, निवासी चकबदरी (चकसानी), थाना बभनी, जनपद सोनभद्र को न्यायालय ने दोषसिद्ध किया।दो धाराओं में सुनाई गई सजामाननीय सत्र न्यायालय, सोनभद्र द्वारा 29 सितंबर 2026 को पारित निर्णय के अनुसार अभियुक्त को—धारा 105 बीएनएस में 10 वर्ष के कारावास एवं ₹10,000 अर्थदंड।धारा 115(2) बीएनएस में 6 माह के कारावास एवं ₹500 अर्थदंड से दंडित किया गया।इस प्रकार अभियुक्त पर दोनों धाराओं में कुल ₹10,500 का अर्थदंड लगाया गया।प्रभावी पैरवी से सुनिश्चित हुई दोषसिद्धिसोनभद्र पुलिस के अनुसार, अभियोग में थाना बभनी पुलिस द्वारा प्रभावी विवेचना करते हुए साक्ष्यों का सुदृढ़ संकलन किया गया। अभियोजन अधिकारी द्वारा न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई। इसके साथ ही कोर्ट मोहर्रिर के समन्वय तथा जनपद मॉनिटरिंग सेल द्वारा मामले की सतत निगरानी एवं प्रभावी अनुश्रवण किया गया।पुलिस की इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप न्यायालय में अभियोजन पक्ष अपना मामला सिद्ध करने में सफल रहा और अभियुक्त को दोषसिद्ध कराते हुए प्रभावी सजा सुनिश्चित कराई गई।
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