अश्रुपूरित विदाई में झलका शिक्षकों के प्रति सम्मान, नम आंखों से दी गई भावभीनी विदाई
राजकीय हाई स्कूल दीघुल के सभागार में आयोजित विदाई समारोह भावनाओं का सागर बन गया। वर्षों तक शिक्षा रूपी दीप जलाकर समाज को रोशन करने वाले इन दोनों शिक्षकों को जब सम्मानपूर्वक विदा किया गया, तो पूरा परिसर भावुकता से भर उठा।
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1:12 PM, Apr 9, 2026
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: Jitendra Chandravanshi

Photo : Sonprabhat News
विकास खंड दुद्धी के महुली निवासी सत्यनारायण कन्नौजिया एवं हिराचक निवासी अरुण कुमार मिश्रा के सेवानिवृत्ति अवसर पर 31 मार्च 2026 को राजकीय हाई स्कूल दीघुल के सभागार में आयोजित विदाई समारोह भावनाओं का सागर बन गया। वर्षों तक शिक्षा रूपी दीप जलाकर समाज को रोशन करने वाले इन दोनों शिक्षकों को जब सम्मानपूर्वक विदा किया गया, तो पूरा परिसर भावुकता से भर उठा। मंच से लेकर श्रोताओं तक हर चेहरा गम और गर्व के मिश्रित भावों से भरा नजर आया। जैसे ही सम्मान की परंपरा आगे बढ़ी, दोनों शिक्षकों की आंखें नम हो गईं और माहौल पूरी तरह संवेदनाओं से सराबोर हो गया।
अरुण कुमार मिश्रा ने साझा किए जीवन के अनुभव
प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो रहे अरुण कुमार मिश्रा ने अपने उद्बोधन में कहा— "विद्यालय केवल कार्यस्थल नहीं, बल्कि एक परिवार होता है। यहां बिताया हर दिन मेरे जीवन का अमूल्य हिस्सा रहा है।" उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि उन्होंने हमेशा संस्था को ऊंचाइयों तक ले जाने और विद्यार्थियों के जीवन में उजाला भरने का प्रयास किया। "आज पद से अलग जरूर हो रहा हूं, लेकिन इस विद्यालय की हर स्मृति मेरे दिल के करीब रहेगी। आप सभी का स्नेह ही मेरी सबसे बड़ी कमाई है।" इस अवसर पर उन्होंने प्रधानाचार्य का कार्यभार औपचारिक रूप से उदय राज को सौंपते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
सत्यनारायण कन्नौजिया: शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, संस्कार भी देता है
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सहायक अध्यापक सत्यनारायण कन्नौजिया ने अपने संबोधन में कहा— "शिक्षक का कर्तव्य केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि संस्कार देना भी होता है।" भावुक होते हुए उन्होंने कहा— "आज इस विद्यालय से विदा लेना ऐसा लग रहा है जैसे अपने ही घर का एक हिस्सा छोड़ रहा हूं। यहां का हर कोना मेरी स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा।"

गरिमामयी उपस्थिति और सादगीपूर्ण संचालन
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कार्यक्रम का संचालन सहायक अध्यापक डॉ. आनंद कुमार गौतम ने गरिमापूर्ण ढंग से किया। इस अवसर पर श्यामा चरण सिंह (प्रधानाचार्य, राजकीय हाई स्कूल बैरखड़), राघवेंद्र जायसवाल, लाल साहब, रामरक्षा, देवेश मोहन, अशरफ सहित अनेक शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
घर पहुंचने पर हुआ भव्य स्वागत
विदाई के बाद जब सत्यनारायण कन्नौजिया सपत्नीक अपने घर पहुंचे, तो छोटे भाई लक्ष्मण कन्नौजिया ने परिवार सहित उनका भव्य स्वागत किया। वहीं बहन उर्मिला देवी ने आशीर्वाद देकर उनका गृह प्रवेश कराया। विद्यालय के शिक्षकगण उन्हें सम्मानपूर्वक उनके घर तक छोड़ने पहुंचे, जो उनके प्रति स्नेह और सम्मान का प्रतीक बना।
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दिल को छू लेने वाली विदाई, यादों में बस गया एक युग
यह समारोह केवल एक विदाई नहीं, बल्कि एक युग के समापन का साक्षी बना। समारोह में गूंजे शब्द हर किसी के दिल में उतर गए—"दीप बुझता नहीं, बस स्थान बदलता है, शिक्षक रुकता नहीं, बस पीढ़ियों में बंट जाता है।" सत्यनारायण कन्नौजिया और अरुण कुमार मिश्रा की विदाई ने यह संदेश दे दिया कि— सच्चा शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह अपने छात्रों में हमेशा जीवित रहता है।






