Sonbhadra : सात साल बाद भी नहीं बुझी ग्रामीणों की प्यास, सोमा गांव बना हर घर नल जल योजना की विफलता का प्रतीक.
नगवां विकास खंड के एक दर्जन से अधिक गांवों में योजना का लाभ नहीं, जन चौपाल में फूटा ग्रामीणों का आक्रोश.
sonbhadra
12:44 PM, Jun 10, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Vedvyas Singh Maurya

Photo : Sonprabhat News
सोनभद्र जिले के नगवां विकास खंड में केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी "हर घर नल जल योजना" पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। विकास खंड के एक दर्जन से अधिक गांवों में आज भी ग्रामीण स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इनमें सोमा ग्राम पंचायत इस योजना की जमीनी हकीकत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अधिकांश परिवारों तक आज तक नियमित जलापूर्ति नहीं पहुंच सकी है।

Photo : Sonprabhat News
सोमा गांव में उस समय ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया जब किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने अपने सामाजिक अभियान "पेड़ है तो प्राण है" के अंतर्गत जन चौपाल का आयोजन कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। चौपाल के दौरान सबसे प्रमुख और गंभीर मुद्दा हर घर नल जल योजना की विफलता का रहा। बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2019 में शुरू हुई योजना के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाने, टंकियों के निर्माण और अन्य कार्यों पर भारी धनराशि खर्च की गई, लेकिन वर्ष 2026 तक भी अधिकांश घरों में पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंच सकी है।
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चौपाल में ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा बार-बार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। ग्रामीणों को आज भी हैंडपंप, कुओं और दूर-दराज के जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब पानी के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

Photo : Sonprabhat News
ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने मौके से ही जिलाधिकारी सोनभद्र को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि जब सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब ग्रामीणों का पानी के लिए भटकना बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल जांच कराकर योजना की वास्तविक स्थिति सामने लाने तथा दोषी अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।
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संदीप मिश्रा ने कहा कि विकास योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है, लेकिन यदि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएं तो यह जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया और योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया गया, तो किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा ग्रामीणों के साथ मिलकर व्यापक जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
जन चौपाल के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष चर्चा की गई। संदीप मिश्रा ने ग्रामीणों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए जल संरक्षण और वृक्षारोपण दोनों आवश्यक हैं।
वर्तमान परिस्थितियों में सोमा गांव की स्थिति केवल एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि नगवां विकास खंड के उन अनेक गांवों की तस्वीर प्रस्तुत करती है जहां हर घर नल जल योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है। ऐसे में अब ग्रामीणों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला आने के बाद प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे ग्रामीणों को उनके हिस्से का पानी कब तक मिल पाता है।
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ग्रामीणों का सवाल
"जब करोड़ों रुपये खर्च हो गए, पाइपलाइन बिछ गई, टंकियां बन गईं, तो आखिर सात साल बाद भी गांव के घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा?" — यही सवाल आज सोमा गांव के साथ-साथ नगवां क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों के मन में है, जिसका जवाब प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा।






