नवरात्र का दूसरा दिन- दीर्घायु और मनोकामना पूर्ति के लिए करें माँ ब्रह्मचारिणी की करे आराधना, मिश्री और पंचामृत का लगाएं भोग.
दीर्घायु और मनोकामना पूर्ति के लिए करें माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना, मिश्री और पंचामृत का लगाएं भोग.
sonebhadra
6:44 AM, Oct 12, 2026
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Edited By: U. Gupta , Reported By: यू . गुप्ता

नवरात्र का दूसरा दिन आज, माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलती है तप, त्याग और धैर्य की प्रेरणा
नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। माँ ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी आराधना से भक्तों को धैर्य, आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं तथा उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका नाम ब्रह्मचर्य और तपस्या के आचरण से जुड़ा है। मान्यता है कि माँ की कृपा से साधक अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है और जीवन में सत्य एवं सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्त माँ की आराधना कर जीवन में सुख-शांति और सफलता की कामना करते हैं। योग परंपरा में माँ ब्रह्मचारिणी का संबंध स्वाधिष्ठान चक्र से भी बताया जाता है। नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है—
दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
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इसके अलावा भक्त “ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप भी कर सकते हैं। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से मन एकाग्र होता है और साधना के प्रति समर्पण बढ़ता है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा में गुड़हल और कमल के फूल अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन माँ को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। पूजा के बाद पान-सुपारी अर्पित कर देवी की प्रदक्षिणा की जाती है। इसके बाद घी और कपूर से माँ की आरती उतारी जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, कन्याओं को सुगंधित तेल भेंट करने का भी विधान बताया गया है। पूजा के अंत में माँ से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है।
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‘आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
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पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरि॥’
नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना कर श्रद्धालु सुख, शांति, दीर्घायु और समृद्धि की कामना करते हैं। माँ का यह स्वरूप संदेश देता है कि धैर्य, संयम और दृढ़ संकल्प के साथ कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है।






