Sonbhadra crime:डिलीवरी के दौरान कथित प्रताड़ना का मामला, कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश,चार डॉक्टरों पर एफआईआर का आदेश, सात दिन में मांगी आख्या
सोनभद्र। निजी अस्पताल में पत्नी की डिलीवरी के दौरान कथित मनमानी, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के मामले में अदालत ने चार डॉक्टरों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन/एफटीसी/14वां वित्त आयोग, सोनभद्र की अदालत ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सात दिन के भीतर अनुपालन आख्या भी तलब की है।
4:32 PM, Sep 5, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

डिलीवरी के दौरान मनमानी और धमकी देने का अधिवक्ता ने लगाया था आरोप
सोनभद्र। निजी अस्पताल में पत्नी की डिलीवरी के दौरान कथित मनमानी, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के मामले में अदालत ने चार डॉक्टरों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन/एफटीसी/14वां वित्त आयोग, सोनभद्र की अदालत ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सात दिन के भीतर अनुपालन आख्या भी तलब की है।
मामले में अधिवक्ता संतोष पटेल पुत्र इंद्रजीत सिंह, निवासी ग्राम हिनौती, सोनभद्र ने 29 नवंबर 2024 को सीजेएम न्यायालय में धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। अधिवक्ता के मुताबिक, चार अगस्त 2024 की शाम उन्होंने अपनी पत्नी विभा शाक्य को प्रसव के लिए रॉबर्ट्सगंज स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।
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आरोप है कि पांच अगस्त की शाम करीब पांच बजे डॉक्टर मुक्ता सिंह ने ऑपरेशन कर प्रसव कराया। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे और नौ अगस्त को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डिलीवरी के दौरान कथित रूप से अवैध वसूली के लिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। डॉक्टर नेहा सिंह राना पर बदतमीजी करने का भी आरोप लगाया गया है।
अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर आरपी सिंह से मामले की शिकायत की तो कथित तौर पर उन्हें धमकी दी गई। इसके बाद चार सितंबर 2024 को डॉक्टर आरपी सिंह, डॉक्टर मुक्ता सिंह और डॉक्टर नेहा सिंह राना को लीगल नोटिस भेजा गया। आरोप है कि नोटिस मिलने के बाद 12 सितंबर को डॉक्टर नेहा सिंह राना और उसी रात डॉक्टर अखिलेश पटेल ने मोबाइल फोन पर गाली-गलौज करते हुए धमकी दी।
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अधिवक्ता के अनुसार, शिकायत के बावजूद थाने से कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद चार नवंबर 2024 को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से पुलिस अधीक्षक, सोनभद्र को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया। कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
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मामले की पत्रावली 12 दिसंबर 2025 को सीजेएम न्यायालय के आदेश से स्थानांतरित होकर संबंधित अदालत में पहुंची। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की आख्या का अवलोकन किया। एफआईआर दर्ज नहीं होने और आरोपों की प्रकृति को गंभीर मानते हुए अदालत ने पुलिस विवेचना आवश्यक बताई।
अदालत ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाल को मामले में सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही सात दिन के भीतर एफआईआर दर्ज किए जाने के संबंध में आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।






