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विहिप के कार्यकताओं ने रामनवमी के पावन अवसर पर संकट मोचन मंदिर के बाहर जलाए 151 दीपक ।

दुद्धी/सोनभद्र-सोनप्रभात

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8:19 PM, Apr 2, 2020

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Edited by: Ashish Gupta

विहिप के कार्यकताओं ने रामनवमी के पावन अवसर पर संकट मोचन मंदिर के बाहर जलाए 151 दीपक ।
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

दुद्धी/सोनभद्र-सोनप्रभात

जितेंद्र चन्द्रवंशी- संवाददाता

रामनवमी नवरात्रि के अंतिम दिन जो जनसैलाब दिखायी देता है वो नहीं हो सका क्योंकि आज देश में व्यापी कोरोना वैश्विक महामारी त्रासदी को लेकर देश जूझ रहा है। जिसको लेकर माननीय प्रधानमंत्री के आवाहन पर 21 दिनों का लाक डाउन पूरे भारत में किया गया है, जिससे किसी भी धार्मिक पूजा स्थलों व मंदिरों के कपाट पूरे नवरात्र भर बंद रहे।

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इसी को लेकर आज दुद्धी कस्बे में पूरा सन्नाटा रहा आज संध्या के समय रामनवमी के को लेकर विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने संकट मोचन मंदिर के बाहर 151 दीपक जलाकर रामनवमी त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से मनाया। इस मौके पर बबलू सिंह मंडल अध्यक्ष ,संदीप गुप्ता ,आलोक जायसवाल ,भानु प्रताप सिंह, मनीष जायसवाल, जय बाबू जायसवाल,सोनू जायसवाल,धनंजय गुप्ता ,धीरज जायसवाल सभासद आदि मौजूद रहे।

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  • राम होने का अर्थ क्या? राम शब्द जितना छोटा है, इसकी व्याख्या उतनी ही विशाल है। पुराण कहते हैं “रमंते सर्वत्र इति रामः” अर्थात जो सब जगह व्याप्त है वो राम है। संस्कृत व्याकरण और शब्द कोष कहता है “रमंते” का अर्थ है राम, अर्थात जो सुंदर है, दर्शनीय है वो राम है। मनोज्ञ शब्द को भी राम से जोड़ा जाता है। मनोज्ञ का अर्थ है मन को जानने वाला। हिंदी व्याख्याकार राम का अर्थ बताते हैं जो आनंद देने वाला हो, संतुष्टि देने वाला हो।
  • श्रीराम नाम महिमा…..

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चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।। बेद पुरान संत मत एहु। सकल सुकृत राम सनेहु।। (बालकांड, दोहा - 26/चौपाई-1)

अर्थ - चारों युगों में, तीनों कालों में और तीनों लोकों में, नाम को जप कर जीव शोक रहित हुए हैं। वेद, पुराण और संतों का मत यही है कि समस्त पुण्यों का फल श्रीरामजी (या राम नाम) में प्रेम होना है।

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