नवरात्र का चौथा दिन माँ कूष्मांडा की आराधना से दूर होते हैं कष्ट.
माँ कूष्मांडा को चढ़ाएं लाल गुलाब, मालपुए का लगाएं भोग; सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की होगी प्राप्ति.
sonebhadra
6:58 PM, Oct 13, 2026
Share:
Edited By: U. Gupta , Reported By: यू. गुप्ता

नवरात्र का चौथा दिन माँ कूष्मांडा की आराधना से दूर होते हैं कष्ट.
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कूष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार व्याप्त था और सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब माँ ने अपने मंद हास से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की सृजनकर्ता देवी के रूप में पूजा जाता है।
माँ कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं, जबकि आठवें हाथ में सर्वसिद्धि और समृद्धि प्रदान करने वाली जपमाला है। माँ का वाहन सिंह माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ कूष्मांडा का निवास सूर्य लोक में है। योग साधना में उनका संबंध अनाहत चक्र से माना जाता है। नवरात्र के चौथे दिन साधक ध्यान और आराधना के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा तथा सकारात्मकता प्राप्त करने की कामना करते हैं।
नवरात्र के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा शांत मन और श्रद्धाभाव से करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माँ को लाल गुलाब अर्पित करने से वे प्रसन्न होती हैं। वहीं, मालपुए का भोग लगाकर सुख-समृद्धि, दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की जाती है। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करने और जरूरतमंदों को दान देने की भी परंपरा है। इस दिन कन्याओं को मिठाई और उपयोगी वस्तुएं भेंट कर उनका सम्मान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
माँ कूष्मांडा का पूजा मंत्र-
विज्ञापन
या देवी सर्वभूतेषु
यह भी पढ़ें
माँ कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै
विज्ञापन
नमो नमः॥
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कूष्मांडा की आराधना से भक्तों को कष्टों से मुक्ति, सुख-शांति और समृद्धि की प्रेरणा मिलती है। नवरात्र का यह पावन अवसर श्रद्धा, संयम और सकारात्मकता के साथ माँ की उपासना करने का संदेश देता है।





