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सोनभद्र में उर्वरक वितरण घोटाले पर कार्रवाई — 6 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, बिक्री पर रोक

कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करते पाया गया, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

sonbhadra

3:21 PM, Apr 11, 2026

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Edited by: Ashish Gupta

, Reported By: Ashish Gupta

सोनभद्र में उर्वरक वितरण घोटाले पर कार्रवाई — 6 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित, बिक्री पर रोक

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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

सोनभद्र, सोनप्रभात। जनपद में उर्वरक वितरण में अनियमितताओं को लेकर जिला कृषि विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर छह फुटकर उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं, साथ ही इन प्रतिष्ठानों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

आईएफएमएस पोर्टल की जांच में सामने आई गड़बड़ी

जिला कृषि अधिकारी अमरेश कुमार सिंह द्वारा 1 मार्च से 5 अप्रैल के बीच आईएफएमएस पोर्टल की जांच कराई गई। इस दौरान यह सामने आया कि रबी फसल की कटाई के समय, जब उर्वरक की मांग सामान्यतः कम रहती है, कुछ विक्रेताओं द्वारा असामान्य रूप से अधिक वितरण दर्शाया गया।

इन समितियों पर हुई कार्रवाई

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अनियमितता पाए जाने पर जिन विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, उनमें मेसर्स चोपन दीर्घाकार बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति (चोपन), विसरेखी साधन समिति (घोरावल), दुद्धी सहकारी फेडरेशन, मेदनीखाड़ बहुउद्देश्यीय समिति, शिवपुर साधन सहकारी समिति (चतरा) तथा आईएफएफडीसी कृषक सेवा केंद्र (चेतवा, म्योरपुर) शामिल हैं।

बिक्री पर रोक, कृषकवार मांगा गया स्पष्टीकरण

कार्रवाई के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों की उर्वरक बिक्री पर रोक लगाते हुए उनसे कृषकवार स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किस किसान को कितना उर्वरक वितरित किया गया, इसकी पूरी जानकारी स्पष्ट हो।

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निर्धारित दर पर ही होगा उर्वरक वितरण

जिला कृषि अधिकारी अमरेश कुमार सिंह ने निर्देश दिए हैं कि सभी विक्रेता बिना किसी अतिरिक्त टैगिंग या शर्त के निर्धारित सरकारी दरों पर ही उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करें।

कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई

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उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी थोक या फुटकर विक्रेता कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करते पाया गया, तो उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

किसानों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता

जिला कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी व सुचारु बनाए रखने के लिए आगे भी लगातार निगरानी जारी रहेगी।

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