RTI से शुरू हुई लड़ाई पहुंची शासन तक: सूचना न मिलने, भ्रामक जवाब और कार्रवाई में देरी का आरोप, युवक ने उठाए गंभीर सवाल
आरोप है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, बाद में दिए गए जवाब अपूर्ण और भ्रामक थे तथा शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है।
sonbhadra
6:42 PM, Jun 10, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Ashish Gupta

Photo : Sonprabhat News
विशेष रिपोर्ट | मेरी समस्या, मेरी जुबानी सोनप्रभात न्यूज | सोनभद्र
सोनभद्र। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम माना जाता है। लेकिन जब एक नागरिक को सूचना प्राप्त करने के लिए महीनों तक आवेदन, अपील, शिकायत और उच्चाधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं रह जाती, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।
ऐसा ही एक मामला सोनभद्र जिले की दुद्धी तहसील के ग्राम घघरी निवासी उमा प्रसाद का सामने आया है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई, बाद में दिए गए जवाब अपूर्ण और भ्रामक थे तथा शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है।
4 दिसंबर 2025 को दायर हुई थी आरटीआई
उमा प्रसाद के अनुसार उन्होंने 4 दिसंबर 2025 को ऑनलाइन माध्यम से तहसीलदार एवं जन सूचना अधिकारी, दुद्धी को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन में ग्राम पंचायत घघरी में वर्ष 2025-26 के दौरान जारी आय प्रमाण पत्रों, संबंधित नियमों, तैनात लेखपालों तथा आय निर्धारण की प्रक्रिया से जुड़े छह बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
आवेदन में यह भी पूछा गया था कि एक व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में कितनी बार आय प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है तथा यदि किसी लेखपाल द्वारा गलत आय रिपोर्ट लगाई जाती है तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई का प्रावधान है।
निर्धारित समय में नहीं मिली सूचना
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शिकायतकर्ता का कहना है कि आरटीआई अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर उन्हें कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने 30 जनवरी 2026 को प्रथम अपील दाखिल की, लेकिन उनके अनुसार अपील पर भी प्रभावी निर्णय नहीं हुआ। उपलब्ध दस्तावेजों में भी प्रथम अपील लंबित रहने का उल्लेख किया गया है।
जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंची शिकायत
स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने पर उमा प्रसाद ने 17 मार्च 2026 को जिलाधिकारी कार्यालय सोनभद्र को शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना देने में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है और मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
इसके बाद तहसीलदार कार्यालय द्वारा 6 अप्रैल 2026 को पत्रांक संख्या 71/2026 जारी किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस पत्र में मांगी गई सूचना के स्थान पर केवल सामान्य उत्तर भेजा गया तथा कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का जवाब नहीं दिया गया।
"भ्रामक और अपूर्ण सूचना" का आरोप
उमा प्रसाद ने शासन को भेजी गई अपनी विस्तृत शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्हें जो सूचना भेजी गई, उसमें कई तथ्य अधूरे थे। उनका कहना है कि कुछ प्रश्नों के उत्तर देने के बजाय केवल यह लिखा गया कि सूचना आवेदन के साथ संलग्न है, जबकि वास्तविक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पत्र में ऐसे आवेदन का संदर्भ दिया गया जिसकी तिथि और विवरण वास्तविक आवेदन से मेल नहीं खाते थे। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे पूरे प्रकरण में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई और सूचना उपलब्ध कराने की मूल भावना प्रभावित हुई।
राजस्व परिषद ने मांगी जांच रिपोर्ट
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद, लखनऊ में भी शिकायत पहुंची। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार राजस्व परिषद के प्रभारी अधिकारी ने जिलाधिकारी सोनभद्र को पत्र भेजकर शिकायत में वर्णित तथ्यों की जांच कर उप जिलाधिकारी दुद्धी के माध्यम से आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
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इस पत्र में स्पष्ट रूप से शिकायत की जांच कर उत्तरदायित्व निर्धारित करने और आवश्यक अभिलेखों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही गई है। यह दर्शाता है कि मामला उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंच चुका है।
समाधान पोर्टल पर भी लंबित है मामला
उपलब्ध समाधान पोर्टल रिकॉर्ड के अनुसार शिकायत संख्या 20020026004102 राजस्व एवं आपदा विभाग के अंतर्गत दर्ज है। पोर्टल पर 10 जून 2026 तक इसकी स्थिति "लंबित" दिखाई गई है। रिकॉर्ड के अनुसार जिलाधिकारी स्तर से इसे उपजिलाधिकारी दुद्धी को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया गया है, लेकिन अंतिम निस्तारण अभी तक दर्ज नहीं हुआ है।
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शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें
उमा प्रसाद ने शासन और संबंधित अधिकारियों से निम्न मांगें की हैं—
- आरटीआई में मांगी गई सभी सूचनाएं पूर्ण एवं प्रमाणित रूप में उपलब्ध कराई जाएं।
- पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा नियमों की अवहेलना पाई जाती है तो विभागीय कार्रवाई की जाए।
- शिकायतों के निस्तारण की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
- उन्हें हुई मानसिक एवं आर्थिक क्षति का संज्ञान लिया जाए।
जनहित का प्रश्न या व्यक्तिगत संघर्ष?
यह मामला केवल एक व्यक्ति की सूचना प्राप्त करने की लड़ाई भर नहीं है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता, सूचना के अधिकार के क्रियान्वयन, शिकायत निस्तारण प्रणाली की प्रभावशीलता और सरकारी जवाबदेही जैसे व्यापक प्रश्न भी जुड़े हुए हैं।
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यदि किसी नागरिक को सूचना प्राप्त करने के लिए महीनों तक विभिन्न स्तरों पर शिकायतें करनी पड़ें, तो यह व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी चर्चा का विषय बनता है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और दावों की अंतिम सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।
क्या कहता है वर्तमान रिकॉर्ड?
अब तक उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट है कि—
- आरटीआई आवेदन दायर किया गया।
- प्रथम अपील की गई।
- जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दी गई।
- राजस्व परिषद ने जांच रिपोर्ट मांगी।
- समाधान पोर्टल पर मामला लंबित दर्ज है।
- शिकायतकर्ता अभी भी अंतिम कार्रवाई और स्पष्ट निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहा है।
सोनप्रभात का पक्ष
यह रिपोर्ट शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, आरटीआई आवेदन, अपील पत्रों, राजस्व परिषद के पत्राचार एवं समाधान पोर्टल के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित विभागों और अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।






