सोनभद्र में युवक के साथ कथित बर्बरता : अपहरण, प्रताड़ना और वसूली के आरोप, कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल.
Sonbhadra News : पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसे रस्सियों से बांधकर बेरहमी से पीटा, निर्वस्त्र किया और उसके जख्मों पर नमक रगड़ा गया। इतना ही नहीं, उसे जबरन शराब पिलाई गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई
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2:20 PM, Apr 25, 2026
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Edited by: Sonprabhat News Desk
, Reported By: Sanjay Singh / Vedvyas Singh Maurya

Image : Sonprabhat News
सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र से सामने आए एक सनसनीखेज मामले ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। ऐलाही गांव निवासी अमित पटेल ने अपने साथ हुई कथित अमानवीय घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि लेनदेन के विवाद में उसे अगवा कर एक कमरे में बंधक बनाया गया और कई घंटों तक उसके साथ बर्बरता की गई। इस घटना ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित के अनुसार, आरोपियों ने उसे रस्सियों से बांधकर बेरहमी से पीटा, निर्वस्त्र किया और उसके जख्मों पर नमक रगड़ा गया। इतना ही नहीं, उसे जबरन शराब पिलाई गई, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और उसे उल्टियां होने लगीं। इसके बावजूद कथित तौर पर आरोपियों द्वारा प्रताड़ना जारी रखी गई। अमित पटेल का कहना है कि इस पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया और उसे धमकी दी गई कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो वीडियो को वायरल कर दिया जाएगा।
अमित पटेल ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उससे जबरन कुछ कागजातों पर हस्ताक्षर करवाए। साथ ही, उसके माता-पिता को फोन कर तीन लाख रुपये लेकर आने के लिए कहा गया। पीड़ित का दावा है कि यदि आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की जाए तो घटना से संबंधित वीडियो बरामद हो सकता है। उसने यह भी कहा है कि वह उस स्थान की पहचान कर सकता है जहां उसके साथ यह सब हुआ।
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घटना के बाद न्याय की उम्मीद में भटकते पीड़ित को शुरुआत में निराशा ही हाथ लगी। उसका कहना है कि वह लगातार तीन दिनों तक कोतवाली का चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उसे थाने और अस्पताल के बीच दौड़ाया जाता रहा, बावजूद इसके उसकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
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मामला जब मीडिया में उजागर हुआ, तब पुलिस हरकत में आई। अब पीड़ित की तहरीर के आधार पर दो नामजद समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आम नागरिक को न्याय पाने के लिए मीडिया का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी पारदर्शिता और तत्परता के साथ जांच कर दोषियों को सजा दिलाने में सफल होती है।






