रिहंद जलाशय में राख का जहर — तापीय परियोजनाओं की लापरवाही से बढ़ता प्रदूषण, लोगों की सेहत पर संकट
आए दिन राखयुक्त पानी को रिहंद जलाशय में छोड़ा जा रहा है। जलाशय के किनारों पर जमी राख और मिट्टी की स्थिति देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़े पैमाने पर राख का बहाव हो रहा है। यह न केवल पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन है, बल्कि क्षेत्र की जल गुणवत्ता के लिए भी गंभीर खतरा है।
sonbhadra
3:55 PM, Apr 11, 2026
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: Ashish Gupta

AI Generated Image : Sonprabhat
सोनभद्र, सोनप्रभात। देश की ऊर्जा राजधानी कहे जाने वाले सोनभद्र में विकास की रफ्तार के बीच पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडराता दिख रहा है। रिहंद जलाशय, जो लाखों लोगों के जीवन और जल स्रोत का आधार है, अब धीरे-धीरे प्रदूषण की चपेट में आता जा रहा है। आरोप है कि आसपास की तापीय परियोजनाओं से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) का उचित निस्तारण न होने के कारण यह सीधे जलाशय में पहुंच रही है, जिससे जल और वायु दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
जलाशय में बह रही राख, बढ़ता प्रदूषण
स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन राखयुक्त पानी को रिहंद जलाशय में छोड़ा जा रहा है। जलाशय के किनारों पर जमी राख और मिट्टी की स्थिति देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़े पैमाने पर राख का बहाव हो रहा है। यह न केवल पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन है, बल्कि क्षेत्र की जल गुणवत्ता के लिए भी गंभीर खतरा है।
लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा सीधा असर
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प्रदूषण के कारण क्षेत्र में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उड़ती राख और धूल के चलते सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
राख निस्तारण के नाम पर खानापूर्ति
तापीय परियोजना प्रबंधन पर आरोप है कि राख निस्तारण के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि न तो राख के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था है और न ही पर्यावरण मानकों का पालन किया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद जारी गड़बड़ी
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प्रबंधन की ओर से यह दावा किया जाता है कि जलाशय क्षेत्र में स्थायी गेट, सुरक्षा गार्ड और सीआईएसएफ की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर राखयुक्त पानी को जलाशय में छोड़ा जा रहा है।
सड़कों पर उड़ती राख बनी मुसीबत
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डिबुलगंज से शक्तिनगर तक लगभग 23 किलोमीटर के दायरे में सड़कों पर उड़ती धूल ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। कंपनियों से निकलने वाली राख और धूल के कारण दिन में भी धुंध जैसा माहौल बन जाता है। सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव न होने से समस्या और गंभीर हो गई है।
प्रदूषण नियंत्रण के दावे फेल
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पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जारी निर्देशों का क्षेत्र में कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालात यह हैं कि पूरा परिक्षेत्र धीरे-धीरे विषाक्त वातावरण की ओर बढ़ रहा है।
माफिया और सिस्टम की मिलीभगत पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राख निस्तारण के नाम पर बड़े स्तर पर अवैध खेल चल रहा है, जिसमें माफिया और कुछ जिम्मेदार लोग शामिल हो सकते हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन और प्रबंधन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रबंधन का पक्ष
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इस मामले में अनपरा तापीय परियोजना के जीएम (प्रशासन) निखिल चतुर्वेदी ने कहा कि “रिहंद जलाशय में राख न जाने देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। वहां सुरक्षा के दृष्टिकोण से गार्डों की तैनाती की गई है। यदि इसके बावजूद कहीं से राख बहाई जा रही है, तो इसकी जांच कराई जाएगी।”
जलाशय पर निर्भर लाखों लोगों के भविष्य पर खतरा
रिहंद जलाशय केवल जल स्रोत ही नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। ऐसे में इसका प्रदूषित होना न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर संकट का संकेत है।






