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बिना पर्चे बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

बिना पर्चे बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

6:47 AM, Jun 11, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

बिना पर्चे बिक रहीं प्रतिबंधित दवाएं, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क


दुद्धी(सोनभद्र)।विंढमगंज बाजार में कथित रूप से नशीली एवं प्रतिबंधित दवाओं की खुलेआम बिक्री को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कुछ मेडिकल स्टोरों पर बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के ही ऐसी दवाएं बेची जा रही हैं, जिनका दुरुपयोग युवाओं द्वारा नशे के रूप में किया जा रहा है। इससे न केवल युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक व्यवस्था पर भी खतरा मंडराने लगा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय से इस गंभीर समस्या को लेकर शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर कुछ दुकानदार मुनाफे के लिए युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। नशे की गिरफ्त में आ रहे युवाओं के कारण परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है।क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लगाई गई तो आने वाले दिनों में अपराध, चोरी, मारपीट और अन्य सामाजिक बुराइयों में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, ड्रग इंस्पेक्टर और पुलिस प्रशासन से संयुक्त अभियान चलाकर मेडिकल स्टोरों की जांच कराने की मांग की है।नागरिकों ने मांग की है कि जिन दुकानों पर नियमों के विरुद्ध दवाओं की बिक्री हो रही है, उनके लाइसेंस की जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री की निगरानी के लिए विशेष अभियान चलाया जाए ताकि युवाओं को नशे की दलदल में जाने से रोका जा सके।क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित विभाग जल्द कार्रवाई नहीं करता तो जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों से शिकायत कर व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग, ड्रग विभाग और पुलिस प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाते हैं।

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