लू और बाढ़ को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट, अमित शाह ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक.
देशभर में ‘शून्य जनहानि’ रणनीति पर जोर, राज्यों को समय रहते तैयारी के निर्देश
new delhi
9:46 AM, May 11, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Social Desk

Image : Sonprabhat News
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में लगातार बढ़ती गर्मी और आगामी मानसून को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सावधान हो गई है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें देशभर में संभावित भीषण गर्मी और बाढ़ की स्थिति से निपटने की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।
बैठक में गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारतीय मौसम विभाग (IMD), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग समेत विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में “जीरो कैजुअल्टी एप्रोच” यानी जनहानि को न्यूनतम रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने सभी राज्यों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक में सबसे अधिक जोर शुरुआती चेतावनी प्रणाली यानी अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने पर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि मौसम और बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए आधुनिक तकनीक, रियल टाइम डेटा और सैटेलाइट मॉनिटरिंग का इस्तेमाल लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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गृह मंत्री ने निर्देश दिए कि बाढ़ और हीटवेव से जुड़ी चेतावनियां जिला और गांव स्तर तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि लोगों को पहले से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके और नुकसान को कम किया जा सके।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि इस बार कई राज्यों में गर्मी और मानसून दोनों की चुनौती एक साथ देखने को मिल सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं, राहत शिविरों, पेयजल व्यवस्था और मेडिकल सपोर्ट को पहले से तैयार रखने पर विशेष जोर दिया गया।
अमित शाह ने NDRF और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि संवेदनशील और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां पहले से राहत और बचाव टीमें तैनात की जाएं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव, राहत सामग्री, दवाइयां और संचार उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया।
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भीषण गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को अतिरिक्त तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही राज्यों से कहा गया कि जरूरत पड़ने पर स्कूलों, पंचायत भवनों और सामुदायिक केंद्रों को राहत शिविरों में बदला जा सकता है।
बैठक में आपदा प्रबंधन में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। केंद्र सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और सटीक मौसम पूर्वानुमान के जरिए बाढ़ और गर्मी से होने वाली जनहानि और आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अधिकारियों ने गृह मंत्री को बताया कि विभिन्न एजेंसियां मिलकर एकीकृत डेटा सिस्टम पर काम कर रही हैं, जिससे आपदा के समय अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय और तेज हो सकेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष मानसून के दौरान बिहार, असम, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर के कई राज्य बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जबकि राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भीषण गर्मी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
ऐसे में केंद्र सरकार की यह समीक्षा बैठक आगामी महीनों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का ध्यान इस बार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि पहले से तैयारी और तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन पर भी है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर इस बार मानसून और गर्मी के दौरान जनहानि को न्यूनतम रखने का लक्ष्य तय किया गया है।






