बिजली के अभाव में बेकार पड़ा सामुदायिक शौचालय — जामपानी गांव के ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों के अनुसार शौचालय निर्माण के साथ बोरिंग की व्यवस्था भी कराई गई थी, ताकि पानी की समस्या न हो। लेकिन बिजली कनेक्शन न होने के कारण बोरिंग चालू नहीं हो पाती, जिससे पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप शौचालय का उपयोग लगभग बंद हो गया है।
muirpur
2:02 PM, Apr 11, 2026
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: Prashant Dubey

Public Toilet Jampani : Photo- Sonprabhat
म्योरपुर (सोनभद्र), सोनप्रभात। म्योरपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत जामपानी के सरतान टोला में स्थित सामुदायिक शौचालय आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उपयोग से वंचित है। हरिचरण गोड़ के घर के पास बना यह शौचालय कई वर्ष पहले तैयार किया गया था, लेकिन आज तक बिजली न पहुंचने के कारण यह ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहा है।
बिजली नहीं, तो पानी भी नहीं — शौचालय बना बेकार
ग्रामीणों के अनुसार शौचालय निर्माण के साथ बोरिंग की व्यवस्था भी कराई गई थी, ताकि पानी की समस्या न हो। लेकिन बिजली कनेक्शन न होने के कारण बोरिंग चालू नहीं हो पाती, जिससे पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप शौचालय का उपयोग लगभग बंद हो गया है।

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रात और भोर में बढ़ती परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि रात और तड़के सुबह के समय शौचालय का उपयोग करना बेहद कठिन हो जाता है। अंधेरे के कारण विषैले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है, जिससे खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज
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स्थानीय ग्रामीण हरदेव, रामप्रसाद, शिवशंकर, शिवप्रसाद, हरिकिशुन, रामवृक्ष, ननकू, जयसिंह, देवसिंह और संगीता सहित अन्य लोगों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि शौचालय का समुचित उपयोग हो सके।
दीपक तले अंधेरा — ऊर्जा राजधानी में बुनियादी संकट
यह स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब सोनभद्र और सिंगरौली जैसे जिले देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में जाने जाते हैं। यहां एनसीएल, एनटीपीसी, यूपी पावर कॉर्पोरेशन, लेंको और हिंडालको जैसी बड़ी कंपनियां बिजली उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। बावजूद इसके, स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव “दीपक तले अंधेरा” वाली स्थिति को दर्शाता है।
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विकास के दावों पर सवाल
म्योरपुर ब्लॉक के आदिवासी बहुल क्षेत्र जामपानी में आज भी शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा बिजली के अभाव में उपयोग से बाहर है। ऐसे में विकास के दावों पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।






