निर्माणाधीन हाई स्कूल में भ्रष्टाचार का खेल, छात्रों की जिंदगी दांव पर
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की मजबूती के लिए सबसे अहम कॉलम और फाउंडेशन के निर्माण में भारी लापरवाही बरती जा रही है। सीमेंट, सरिया और बालू जैसी मूलभूत सामग्री भी मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह से निर्माण कार्य जारी रहा, तो यह भवन एक-दो साल में ही जर्जर हो सकता है, जिससे भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
सोनभद्र
5:12 PM, Apr 4, 2026
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Edited by: Admin
, Reported By: नरेश गुप्ता

बभनी, सोनभद्र | संवाददाता: नरेश गुप्ता
सोनभद्र के बभनी विकास खंड अंतर्गत घघरी ग्राम पंचायत के सहगोड़ा टोला में बन रहा सरकारी हाई स्कूल इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस विद्यालय को क्षेत्र के बच्चों के उज्जवल भविष्य की नींव बनना था, वही अब कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों के आरोप बेहद चिंताजनक हैं—उनका कहना है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है बल्कि आने वाले समय में बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
स्थानीय ग्रामीणों—राजेश कुमार, पंकज कुमार, अजय भारती और शिवकुमार भारती सहित कई लोगों ने बताया कि निर्माण स्थल पर पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है। न तो कार्यदायी संस्था का कोई बोर्ड लगाया गया है और न ही निर्माण कार्य से संबंधित बजट या विवरण सार्वजनिक किया गया है। बताया जा रहा है कि वाराणसी के एक संविदाकार द्वारा यह निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की मजबूती के लिए सबसे अहम कॉलम और फाउंडेशन के निर्माण में भारी लापरवाही बरती जा रही है। सीमेंट, सरिया और बालू जैसी मूलभूत सामग्री भी मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह से निर्माण कार्य जारी रहा, तो यह भवन एक-दो साल में ही जर्जर हो सकता है, जिससे भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती है।
“स्कूल केवल दीवारों का ढांचा नहीं होता, यह बच्चों के सपनों की नींव होता है… और यदि नींव ही कमजोर हो, तो भविष्य भी खतरे में पड़ जाता है।”
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ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने प्रशासन से तत्काल जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह ने संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, और क्या यह निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप दोबारा सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।
विकास तभी सार्थक है जब वह सुरक्षित हो… अन्यथा वह सिर्फ एक दिखावा बनकर रह जाता है।






