निषाद वंश की उपजातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग
दुद्धी, सोनभद्र। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम उपजिलाधिकारी दुद्धी अशोक कुमार गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विमुक्त जनजाति (DNT) एवं निषाद वंश की उपजातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने तथा जातिगत जनगणना में मझवार के नाम से दर्ज कराने की मांग की गई।
8:05 AM, Sep 1, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

निषाद पार्टी ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम दुद्धी को सौंपा ज्ञापन
दुद्धी, सोनभद्र। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम उपजिलाधिकारी दुद्धी अशोक कुमार गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विमुक्त जनजाति (DNT) एवं निषाद वंश की उपजातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने तथा जातिगत जनगणना में मझवार के नाम से दर्ज कराने की मांग की गई।ज्ञापन में कहा गया कि 31 अगस्त 1952 को भारत सरकार द्वारा विमुक्त जनजातियों को विमुक्त घोषित किया गया था। इसी कारण समाज द्वारा प्रत्येक वर्ष 31 अगस्त को विमुक्त दिवस के रूप में मनाया जाता है।संगठन का कहना है कि 1931 की जनगणना के अनुसार केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, कश्यप (कहार), तुरहा, माँझी और रैकवार आदि निषाद वंश की पर्यायवाची जातियां हैं। इन जातियों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आरक्षण का लाभ मिल रहा है। ज्ञापन में उदाहरण देते हुए कहा गया कि मल्लाह को दिल्ली और पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, जबकि उत्तर प्रदेश में इसे पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में रखा गया है। संगठन ने इसे विसंगति और अन्याय बताते हुए पूरे देश में समान व्यवस्था लागू करने की मांग की।निषाद पार्टी ने मांग की कि जातिगत जनगणना के दौरान निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को मझवार के कॉलम में दर्ज किया जाए और साथ में कोष्ठक में ‘विमुक्त जाति’ भी अंकित किया जाए, ताकि समाज की वास्तविक जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आ सके।इसके अलावा उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की पर्यायवाची जातियों को अन्य राज्यों की तर्ज पर अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की गई। ज्ञापन में संविधान समीक्षा आयोग (2000-02) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वेंकटचलैया की सिफारिशों का हवाला देते हुए विमुक्त जनजातियों को महाराष्ट्र और पंजाब की तरह शिक्षा एवं राजनीति में आरक्षण तथा पेंशन की सुविधा देने की मांग भी उठाई गई।संगठन ने वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में निषाद वंश के शहीदों के गांवों को ‘आदर्श शहीद गांव’ घोषित करने की मांग भी की।उपरोक्त मांगों से संबंधित ज्ञापन विधानसभा अध्यक्ष हृदयराम साहनी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम उपजिलाधिकारी दुद्धी अशोक कुमार गुप्ता को सौंपा गया।
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