होमवीडियो LIVE
BREAKING
विज्ञापन

संपादकीय: सोनभद्र का ‘हेलीपैड विकास मॉडल’, उड़ते सपनों का जिला।

संपादकीय | सोनभद्र : आशीष गुप्ता / सोन प्रभात

sonbhadra

9:05 AM, Jan 21, 2026

Share:

Edited by: Ashish Gupta

संपादकीय: सोनभद्र का ‘हेलीपैड विकास मॉडल’, उड़ते सपनों का जिला।
हमसे जुड़ने के लिए फॉलो करें:
Instagram
सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

संपादकीय | सोनभद्र : आशीष गुप्ता / सोन प्रभात

सोनभद्र अब ‘उड़नखटोला’ की धरती कही जानी चाहिए। ज़मीनी अनुभवों के साथ सोनभद्र अब सिर्फ खनिजों, जंगलों, नदियों और संघर्षों की धरती नहीं रहा। सोनभद्र वह जिला बन गया है, जहाँ सपने सबसे पहले हवा में उड़ान भरते हैं और ज़मीन पर उतरने से पहले ही फाइलों में लैंड कर जाते हैं। वर्षों से म्योरपुर का हवाई अड्डा बड़े संयम, धैर्य और सरकारी श्रद्धा के साथ “विश्राम मुद्रा” में है—न उड़ान, न यात्री, न शोर—बस रनवे पर पसरी एक ऐतिहासिक चुप्पी। और अब, उसी ऐतिहासिक चुप्पी को और ऊँचाई देने के लिए प्रशासन ने निर्णय लिया है कि दो नए हेलीपैड बनाए जाएंगे। क्योंकि जब ज़मीन पर चलने के रास्ते टूटे हों, अस्पताल दूर हों, स्कूलों तक पहुँच कठिन हो, तब समाधान हमेशा ऊपर से ही आता है—हवा के रास्ते। सोच भी दूरदर्शी है! आखिर किसान, मज़दूर और आदिवासी कब तक पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल या खचाखच भरी बसों में धक्के खाते रहेंगे? अब समय आ गया है कि वे हवाई किसान, एरियल मज़दूर और फ्लाइंग आदिवासी बनें। बहुत जल्द सोनभद्र के पहाड़ों के ऊपर दृश्य बदलेगा— नीचे खेतों में हल चलेगा और ऊपर हेलीकॉप्टर। अब किसान जब चाहेगा, अपनी फसल की समस्या लेकर सीधे दिल्ली तक “हॉप” कर आएगा। “आज गेहूँ बोना है, कल मंत्रालय में मीटिंग”— समय की बचत होगी, ऊर्जा बचेगी और कमाई तो आसमान छूने के लिए पहले से ही तैयार है—आखिर सफर भी तो आसमान का है। [caption id="attachment_71744" align="aligncenter" width="1024"]

Image

विज्ञापन

प्रतीकात्मक तस्वीर : AI[/caption] मज़दूर भाई जो अब तक ईंट-भट्ठों और खदानों में पसीना बहाता था, वह अब सुबह हेलीकॉप्टर से साइट पर उतरेगा और शाम को हवा में ही घर लौटेगा। और आदिवासी समाज—जो आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है—वह अब नक्शे पर नहीं, हवाई रूट चार्ट पर दिखाई देगा। सच कहूँ तो मुझे अपने बचपन की याद आती है। जब हम देखते थे, बीमार को खाट पर बाँधकर किलोमीटरों पैदल ले जाया जाता था। तब किसी ने नहीं सोचा था कि समस्या सड़क की है या अस्पताल की। लेकिन आज समाधान बिल्कुल स्पष्ट है— हेलीपैड। [caption id="attachment_71745" align="aligncenter" width="1024"]

Image

विज्ञापन

Demo Pic : AI[/caption] हेलीपैड वह जादुई शब्द है, जो हर ज़मीनी सवाल को हवा में उड़ा देता है। सड़क नहीं? कोई बात नहीं। डॉक्टर नहीं? चिंता न करें। स्कूल तक रास्ता नहीं? भविष्य में हेलीकॉप्टर से पढ़ाई संभव है। और सबसे बड़ी बात—अब सोनभद्र को पिछड़ा नहीं कहा जाएगा। क्योंकि जहाँ हेलीपैड हों, वहाँ पिछड़ापन कैसे टिकेगा? म्योरपुर एयरपोर्ट चुपचाप यह सब देख रहा होगा— शायद सोच रहा होगा, “मैं बेकार नहीं हूँ, मैं सिर्फ भविष्य का प्रतीक हूँ।” सरकारी योजनाएँ अक्सर हमें सपने देखने की आदत डाल देती हैं। फर्क बस इतना है कि सपने ज़मीन से जुड़े हों तो आँखें खुली रहती हैं, और जब सपने हवा में हों तो ताली बजती है। सोनभद्र में अब तालियों की गूँज ऊपर तक जाएगी। आने वाले समय में खबरें कुछ यूँ होंगी— “आज एक किसान हेलीकॉप्टर से समय पर खेत पहुँचा।” “एक मज़दूर ने हवाई यात्रा से थकान कम की।” “आदिवासी युवक ने जंगल से उड़ान भरकर विकास को छुआ।” और हम—ज़मीन पर खड़े लोग—नीचे से ऊपर देखकर गर्व करेंगे कि हमारा जिला अब सिर्फ संसाधनों से नहीं, संभावनाओं से उड़ रहा है। बस एक छोटी-सी दुआ है— कभी फुर्सत मिले तो नीचे भी देख लिया जाए। क्योंकि हवा में उड़ते सपनों को सहारा देने के लिए ज़मीन का मज़बूत होना भी ज़रूरी होता है। — आशीष गुप्ता (सोनभद्र / सम्पादक : सोन प्रभात)

सम्बंधित खबर

शहरी खबरें

और पढ़ें

Breaking से पहले Believing —
Son Prabhat News, since 2019

Follow Us:

Instagram

Download App

Play Store

Subscribe Now

Play StoreSonprabhat Live

© Copyright Sonprabhat 2026. All rights reserved.

Developed by SpriteEra IT Solutions