योगी सरकार से मिला ‘सहारा’, संजू ने भरी सपनों की ‘उड़ान’मिलेट्स उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनीं सोनभद्र की संजू, समूह की महिलाओं को भी मिला रोजगार
योगी सरकार से मिला ‘सहारा’, संजू ने भरी सपनों की ‘उड़ान’ मिलेट्स उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनीं सोनभद्र की संजू, समूह की महिलाओं को भी मिला रोजगार
6:04 PM, Jul 21, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

सोनभद्र। प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) का सकारात्मक असर अब गांवों में साफ दिखाई दे रहा है। सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत सजौर के मजरा मझिगांव चौबे की रहने वाली 41 वर्षीय संजू कुशवाहा इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं। मिलेट्स (श्रीअन्न) से बने बिस्कुट, कुकीज, नमकीन और लड्डू तैयार कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की नई राह खोली है।संजू वर्ष 2020 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं। मिशन के तहत आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण और मिलेट्स आधारित उत्पाद बनाने की तकनीक सीखी। प्रशिक्षण के बाद दिसंबर 2024 में उन्होंने एनआरएलएम से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर छोटे स्तर पर मिलेट्स उत्पादों का निर्माण शुरू किया।शुरुआत आसान नहीं थी। उत्पादन और विपणन दोनों स्तरों पर कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन संजू ने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। उनके उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद ने जल्द ही स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना ली। आज उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले कुकीज, बिस्कुट और नमकीन की मांग लगातार बढ़ रही है।संजू की सफलता से प्रेरित होकर उनके स्वयं सहायता समूह में आठ महिलाएं भी जुड़ चुकी हैं। सभी महिलाएं मिलकर उत्पादन कार्य में सहयोग कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला औसतन 10 हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही है, जबकि संजू स्वयं सभी खर्चों के बाद हर महीने 20 हजार रुपये से अधिक की बचत कर रही हैं।संजू बताती हैं कि कभी उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। पति की निजी नौकरी से तीन बच्चों का पालन-पोषण करना मुश्किल हो जाता था। लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिले प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। आज उनकी बड़ी बेटी लखनऊ में पढ़ाई कर रही है और अन्य दोनों बच्चों को भी बेहतर शिक्षा मिल रही है।संजू का कहना है कि यदि उन्हें एनआरएलएम का सहयोग और प्रशिक्षण नहीं मिला होता तो वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। अब उनका लक्ष्य आधुनिक मशीनें लगाकर उत्पादन क्षमता बढ़ाना और अपने मिलेट्स उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना है।संजू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं।
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