बैढ़न में भव्य कवि सम्मेलन, तालियों से गूंज उठा सभागार
वरिष्ठ साहित्यकार शंकर प्रसाद शुक्ल के नवीन काव्य संग्रह ‘हृदय सिंधु के मोती’ का हुआ विमोचन
singrauli
6:53 PM, Sep 18, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Suresh Gupt 'Gwaliyari'

बैढ़न। हिंदी दिवस एवं हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत 17 सितंबर को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बैढ़न के सभागार में ‘बघेली भाषा के उन्नयन एवं दशा और दिशा’ विषय पर व्याख्यान तथा विंध्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित साहित्यकारों द्वारा भव्य कवि सम्मेलन एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सभागार में मौजूद सैकड़ों विद्यार्थियों एवं साहित्यप्रेमियों ने कवियों की रचनाओं पर जमकर तालियां बजाईं और ‘वाह-वाह’ से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य श्री आर.के. झा के स्वागत भाषण तथा मां सरस्वती की प्रतिमा के पूजन के साथ हुआ। इसके बाद कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे वनस्पति विभाग के व्याख्याता डॉ. प्रदीप दुबे ‘सत्यव्रत’ ने मां वाणी की वंदना के लिए वरिष्ठ कवयित्री पं. विजय लक्ष्मी शुक्ला ‘संवेदना’ को आमंत्रित किया। उन्होंने सुमधुर कंठ से मां वीणावादिनी की स्तुति प्रस्तुत कर कार्यक्रम को काव्यमय वातावरण प्रदान किया।
बघेली भाषा के उन्नयन पर सारगर्भित व्याख्यान
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता सीधी से पधारे बघेली साहित्य के उन्नयन के लिए सक्रिय डॉ. श्रीनिवास शुक्ल ने ‘बघेली भाषा के उन्नयन एवं दशा और दिशा’ विषय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने बघेली भाषा, उसकी साहित्यिक परंपरा, वर्तमान स्थिति और उसके संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर विचार रखे। इस दौरान बघेली साहित्य से जुड़े अनेक लेखक एवं साहित्यकार भी उपस्थित रहे।
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कवियों ने बांधा समां
कवि सम्मेलन में युवा गजलकार संजीव कुमार पाठक ‘सौम्य’ ने रूहानी गजलों की प्रस्तुति से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। वरिष्ठ कवि शंकर प्रसाद शुक्ल ने आध्यात्मिक एवं समसामयिक संदर्भों पर आधारित गीत और मुक्तक प्रस्तुत किए।
सीधी से पधारे हास्य कवि सतीश पाण्डेय ने अपने चुटीले अंदाज और हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। वहीं वरिष्ठ कवि डॉ. सुरेश मिश्र ‘गौतम’ ने गजल, मुक्तक एवं छंदों के माध्यम से वातावरण को और अधिक काव्यमय बना दिया।
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साहित्यकार सुरेश गिरि ‘प्रखर’ ने राष्ट्रीयता से ओत-प्रोत रचनाएं प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार सुरेश गुप्त ‘ग्वालियरी’ ने गीत, गजल और मुक्तकों की प्रस्तुति से कार्यक्रम में साहित्यिक ऊंचाइयां जोड़ीं।
इसके बाद सुप्रसिद्ध कवयित्री पं. विजय लक्ष्मी शुक्ला ‘संवेदना’ ने हिंदी एवं बघेली भाषा में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें श्रोताओं ने खूब सराहा। सीधी से पधारे सुविख्यात कवि रमाकांत द्विवेदी ‘सावन’ ने अपने सुमधुर कंठ से हिंदी एवं बघेली गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
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कार्यक्रम के अंतिम चरण में सफल संचालक डॉ. प्रदीप दुबे ‘सत्यव्रत’ ने समसामयिक संदर्भों पर आधारित हिंदी एवं बघेली रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को खूब आनंदित किया।
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‘हृदय सिंधु के मोती’ का हुआ विमोचन
कवि सम्मेलन के दौरान विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार शंकर प्रसाद शुक्ल के नवीन काव्य संग्रह ‘हृदय सिंधु के मोती’ का विमोचन भी किया गया। डॉ. श्रीनिवास शुक्ल, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.के. झा सहित उपस्थित गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में पुस्तक का विमोचन संपन्न हुआ।
साहित्य के प्रति विद्यार्थियों में बढ़ेगा सम्मान
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कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों एवं साहित्यकारों का आभार व्यक्त करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजनों से विद्यार्थियों में साहित्य, भाषा और मातृभाषा के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए, जिससे नई पीढ़ी अपनी भाषा और साहित्यिक विरासत से जुड़ सके।
समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं प्राचार्य श्री आर.के. झा ने आमंत्रित कवियों एवं साहित्यकारों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में डॉ. पठानिया, डॉ. व्ही. कुशराम, डॉ. चंद्र प्रभा वर्मा, डॉ. अरविंद पांडेय, डॉ. मीनाक्षी पाण्डेय, डॉ. निशा मिश्रा, डॉ. सपन राज, डॉ. तथागत त्रिपाठी, डॉ. भुवनेश्वर वर्मा, डॉ. राकेश गौतम, अजीत कुमार राय सहित महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, साहित्यप्रेमी एवं विद्वतजन उपस्थित रहे।






