‘हृदय सिंधु के मोती’ काव्य संग्रह का भव्य विमोचन, साहित्यकारों ने रचनाओं को बताया संवेदना और संस्कार का संगम.
विंध्य की साहित्यिक धरा से निकले ‘हृदय सिंधु के मोती’ प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बैढ़न में वरिष्ठ साहित्यकार शंकर प्रसाद शुक्ल के काव्य संग्रह का विमोचन, साहित्यकारों ने रचनाओं में लोकजीवन, आध्यात्मिकता और सामाजिक सरोकारों की सराहना की।
singrauli
12:55 PM, Sep 18, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Suresh Gupt 'Gwaliyari'

Photo : Sonprabhat News
बैढ़न, सिंगरौली। विंध्य क्षेत्र के प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, बैढ़न में 17 सितंबर को वृहद कवि सम्मेलन एवं व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। साहित्यिक वातावरण से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम में विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ साहित्यकार शंकर प्रसाद शुक्ल के नवीन काव्य संग्रह ‘हृदय सिंधु के मोती’ का विद्वतजनों एवं साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति में विमोचन किया गया।
कार्यक्रम में पुस्तक की साहित्यिक विशेषताओं, भाव पक्ष और सामाजिक सरोकारों पर वक्ताओं ने विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। सीधी से पधारे लेखक एवं साहित्यकार डॉ. श्रीनिवास शुक्ल ने कहा कि ‘हृदय सिंधु के मोती’ एक गुलदस्ता है, जिसमें कवि ने विभिन्न काव्य विधाओं को खूबसूरती से संजोया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में सुंदरी, सुमुखी, दुर्मिल, मत्तगयंद, मदिरा सहित विभिन्न छंदों का प्रयोग कवि की साहित्यिक विद्वता को स्पष्ट करता है।
मुख्य अतिथि डॉ. आर.के. झा ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक सृजन से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, जीवन-मूल्यों और साहित्य की विविध विधाओं को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने साहित्य को समाज और नई पीढ़ी के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

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वरिष्ठ कवि सुरेश गुप्त ‘ग्वालियरी’ ने पुस्तक पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ‘हृदय सिंधु के मोती’ शंकर प्रसाद शुक्ल की दूसरी पुस्तक है। इससे पूर्व उनके द्वारा रचित काव्य संग्रह ‘पुष्पांजलि’ को भी पाठकों ने सराहा है। उन्होंने कहा कि इस संग्रह में विभिन्न काव्य विधाओं के मोती बिखरे हुए हैं। पुस्तक में आस्था, संस्कृति और नैतिकता के साथ-साथ शुद्ध भाव, सरल भाषा और गहरी संवेदना का समावेश दिखाई देता है। उन्होंने इसे कवि के हृदय और आत्मा से निकली अभिव्यक्ति बताया।
पं. विजय लक्ष्मी शुक्ला ‘संवेदना’ ने कहा कि पुस्तक में दोहे, मुक्तक और विभिन्न छंदों के माध्यम से कवि ने अपनी भावनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि संग्रह में लोक जीवन के विविध पक्षों के साथ आध्यात्मिक उत्थान की भावना भी दिखाई देती है।
सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. प्रदीप द्विवेदी ‘सत्यव्रत’ ने कहा कि यह पुस्तक कवि के अंतरात्मा की आवाज है। इसमें भाव-सौंदर्य और छंदबद्धता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि नारी की दुर्दशा, नशाखोरी, किसान, मिलावट जैसे विषयों पर लिखी गई रचनाएं वर्तमान समाज की विभिन्न विडंबनाओं और चुनौतियों को सामने लाती हैं।
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खेती-किसानी के साथ साहित्य साधना
बताया गया कि साहित्यकार शंकर प्रसाद शुक्ल शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद साहित्य साधना में सक्रिय हैं। वे ग्राम चिनगी टोला, तहसील बरगवां के मूल निवासी हैं। वर्तमान में खेती-किसानी के साथ लेखन कार्य कर रहे हैं। ग्रामीण जीवन के निकट रहने के कारण उनकी रचनाओं में लोक जीवन, आध्यात्मिक चिंतन तथा सामाजिक अव्यवस्थाओं का जीवंत प्रतिबिंब दिखाई देता है।
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कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों, विद्वतजनों एवं साहित्यप्रेमियों को काव्य संग्रह ‘हृदय सिंधु के मोती’ सादर भेंट किया गया। कार्यक्रम ने साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य किया।
पुस्तक प्राप्त करने के लिए संपर्क
मोबाइल: 0918518941824, 0918889101732






