पेड़ है तो प्राण है' अभियान बना जनआंदोलन, सैकड़ों फलदार पौधे वितरित; पेड़ों की कटाई पर आंदोलन की चेतावनी
पेड़ है तो प्राण है' अभियान बना जनआंदोलन, सैकड़ों फलदार पौधे वितरित
5:32 PM, Jul 10, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Sanjay singh/ved vyas singh maurya

*संदीप मिश्रा ने 6,000 पेड़ों की कटाई की अनुमति की निष्पक्ष जांच की मांग की, ग्रामीणों ने जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प*
नगवां (सोनभद्र)। नगवां ब्लॉक के सोमा ग्राम पंचायत में किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में "पेड़ है तो प्राण है" अभियान के तहत सैकड़ों फलदार पौधों का वितरण किया गया। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पौधों को अपने परिवार के सदस्य की तरह सुरक्षित रखने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संदीप मिश्रा ने कहा कि "पेड़ है तो प्राण है" अभियान अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन, पेड़, पानी और पहाड़ों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि 24 दिसंबर 2024 के शासनादेश की भावना के अनुरूप बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।संदीप मिश्रा ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से एक निजी कंपनी को लगभग 6,000 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पेड़ों की कटाई नहीं रोकी गई तो किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा पूरे जनपद में व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा।ग्रामीण मुखलाल चेरो ने कहा कि क्षेत्र में कंपनी स्थापित होने से प्रदूषण बढ़ेगा और स्थानीय लोगों के जीवन, खेती तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।बिंदु खरवार ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। यदि क्षेत्र में कंपनी स्थापित करने का प्रयास किया गया तो ग्रामीण सोनभद्र से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।कार्यक्रम में राकेश यादव, मुखलाल चेरो, बिंदु खरवार, बासमती खरवार, हीरावती चेरो, आकाश चौहान, शत्रुघ्न, बीना, दिनेश चेरो, विजय चौहान सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का संदेश दिया गया।
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