पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान: सोनभद्र की ऐतिहासिक धरोहर को संजोने की पहल।
सोनभद्र के ऐतिहासिक धरोहर सहेजने के लिए जिलाधिकारी ने की पहल।
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: Jitendra Chandravanshi

जिलाधिकारी सोनभद्र : Photo - Sonprabhat
सोनभद्र/उत्तर प्रदेश। जनपद की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत चलाए जा रहे राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत अब सोनभद्र जिले में भी व्यापक स्तर पर पाण्डुलिपियों के संग्रह और दस्तावेजीकरण का कार्य शुरू किया गया है।

DM Sonbhadra : Photo - Sonprabhat News
जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में मौजूद प्राचीन पाण्डुलिपियों को खोजकर उन्हें संरक्षित करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखा जा सके। सोनभद्र जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनपद में अनेक ऐसी दुर्लभ पाण्डुलिपियां होने की संभावना है, जो अब तक निजी संग्रहों में संरक्षित हैं।
इस अभियान के तहत जनपद के विभिन्न निजी संस्थानों, संस्कृत पाठशालाओं, मंदिरों, मठों, आश्रमों, गुरुकुलों और ट्रस्टों के साथ-साथ उन विद्वानों से विशेष सहयोग की अपेक्षा की गई है, जिनके पास संस्कृत, प्राचीन भाषाओं या अन्य विषयों से संबंधित पाण्डुलिपियों का निजी संग्रह उपलब्ध है। इसमें विशेष रूप से पुरोहित, धर्माचार्य, ज्योतिषाचार्य, आयुर्वेदाचार्य एवं अन्य विद्वान शामिल हैं।
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प्रशासन ने सभी संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से अनुरोध किया है कि वे अपने पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों की जानकारी एवं प्रतियां 15 अप्रैल 2026, सायं 5:00 बजे तक निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध कराएं। इसके लिए जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद, विकास भवन (कक्ष संख्या-57) तथा जिला सूचना कार्यालय, कलेक्ट्रेट भवन (कक्ष संख्या-32) को संग्रह केंद्र बनाया गया है।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान से न केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा, बल्कि शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। यह पहल सोनभद्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।






