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म्योरपुर : रिबोर कार्य का अब तक नहीं बताया गया स्टीमेट, पारदर्शिता पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि रिबोर कार्य के नाम पर आवश्यकता से अधिक धनराशि खर्च दर्शाई गई है। अब इस मामले में कार्य का स्टीमेट (प्राक्कलन) सार्वजनिक न किए जाने से ग्रामीणों में और अधिक असमंजस की स्थिति बन गई है।

myorpur

12:01 PM, Jul 17, 2026

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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Prashant Dubey

म्योरपुर : रिबोर कार्य का अब तक नहीं बताया गया स्टीमेट, पारदर्शिता पर उठे सवाल

Photo : Sonprabhat News

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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

म्योरपुर विकासखंड की एक ग्राम पंचायत में रिबोर (री-बोरिंग) कार्य को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ दिनों पूर्व ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि रिबोर कार्य के नाम पर आवश्यकता से अधिक धनराशि खर्च दर्शाई गई है। अब इस मामले में कार्य का स्टीमेट (प्राक्कलन) सार्वजनिक न किए जाने से ग्रामीणों में और अधिक असमंजस की स्थिति बन गई है।

स्थानीय सूत्रों एवं पंचायत से संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार, वाउचर संख्या 5THSFC/2025-26/P/6 के माध्यम से दिनांक 06 अगस्त 2025 को ₹90,515 की धनराशि रिबोर कार्य के नाम पर दर्ज दिखाई दे रही है। ऑनलाइन दर्ज इस भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कार्य की वास्तविक लागत, स्वीकृत स्टीमेट और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

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इस संबंध में जब एडीओ पंचायत, म्योरपुर से बातचीत की गई तो उन्होंने ऑनलाइन दर्ज इस प्रविष्टि को सही मानने से इनकार करते हुए इसे "फर्जी" बताया। उनका कहना था कि यदि ऑनलाइन दर्ज जानकारी वास्तविक नहीं है तो इसकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि यह सही है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। इससे सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।

वहीं, जब ग्राम पंचायत के सचिव अरशद खान से रिबोर कार्य का स्टीमेट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया तो उन्होंने कहा कि स्टीमेट की प्रति केवल लिखित आवेदन प्राप्त होने के बाद ही उपलब्ध कराई जाएगी। मौखिक रूप से मांगी गई जानकारी देने से उन्होंने इनकार कर दिया।

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ग्रामीणों का कहना है कि यदि कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ कराया गया है तो स्टीमेट, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान विवरण तथा अन्य अभिलेख सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे सभी शंकाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी और ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

फिलहाल इस मामले में रिबोर कार्य के वास्तविक स्टीमेट और ऑनलाइन दर्ज भुगतान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या ऑनलाइन दर्ज विवरण की जांच कराई जाती है।

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