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लापरवाही:डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज की मौत से हड़कंप, पत्नी ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप

सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बढ़ौली चौक स्थित लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर में एक मरीज की मौत के बाद हड़कंप मच गया। मृतक की पत्नी ने डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉक्टर पर गंभीर हालत के बावजूद करीब चार घंटे तक मरीज को इंतजार कराने और समय पर उपचार न देने का आरोप लगाया है

9:03 PM, Sep 11, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

लापरवाही:डायग्नोस्टिक सेंटर में मरीज की मौत से हड़कंप, पत्नी ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही का आरोप
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क


सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बढ़ौली चौक स्थित लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर में एक मरीज की मौत के बाद हड़कंप मच गया। मृतक की पत्नी ने डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉक्टर पर गंभीर हालत के बावजूद करीब चार घंटे तक मरीज को इंतजार कराने और समय पर उपचार न देने का आरोप लगाया है।मृतक की पत्नी के मुताबिक, वह बिल्ली मारकुंडी की रहने वाली हैं। वह अपने पति को पेट दर्द की समस्या होने पर जांच के लिए लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे जांच की फीस जमा की गई थी। इस दौरान उनके पति पेट दर्द से लगातार कराह रहे थे और उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी।पत्नी का आरोप है कि उन्होंने कई बार डॉक्टर से पति की गंभीर हालत को देखते हुए जल्द जांच करने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। करीब चार घंटे बाद, लगभग 4:30 बजे जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें अंदर ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।घटना के बाद सेंटर पर लोगों की भीड़ जुट गई। मृतक की पत्नी का आरोप है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए यदि उन्हें समय रहते किसी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने सेंटर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की।वहीं, लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉक्टर एसएन सिंह ने आरोपों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके यहां नंबर के आधार पर अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। यदि मरीज गंभीर था तो परिजनों को पहले किसी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मरीज किसी अस्पताल से रेफर होकर नहीं आया था, बल्कि स्वयं जांच कराने के लिए डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचा था।डॉ. सिंह ने बताया कि सेंटर पर प्रतिदिन करीब 30 से 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जाता है और एक मरीज की जांच में लगभग 40 से 45 मिनट का समय लगता है।घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। मामले में मृतक की मौत के वास्तविक कारण और डायग्नोस्टिक सेंटर की भूमिका को लेकर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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