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अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी की दुर्गंध पर भड़की जनता, वार्ता के बाद टला 23 जून का आंदोलन

अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी की दुर्गंध पर भड़की जनता, वार्ता के बाद टला 23 जून का आंदोलन

7:52 PM, Jun 21, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Anil Kumar agrahari

अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी की दुर्गंध पर भड़की जनता, वार्ता के बाद टला 23 जून का आंदोलन
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क


डाला (सोनभद्र)। अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी से निकल रही दुर्गंध और प्रदूषण को लेकर डाला नगर की जनता में बढ़ते आक्रोश के बीच रविवार को नगर पंचायत सभागार में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्रदूषण नियंत्रण विभाग एवं कंपनी प्रबंधन के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोगों ने कंपनी के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई और स्थायी समाधान की मांग की। वार्ता के बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के आश्वासन पर 23 जून को प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया।नगर पंचायत अध्यक्ष फुलवंती गौड़ द्वारा जनता की समस्याओं को देखते हुए अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोला गया था। नगर में लगातार फैल रही दुर्गंध से परेशान लोगों ने आंदोलन का ऐलान किया था, जिसके बाद प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को जनता के साथ वार्ता के लिए आगे आना पड़ा।बैठक में सदर विधायक भूपेश चौबे, उपजिलाधिकारी विवेक कुमार, अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह, प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी जे.एन. तिवारी, क्षेत्राधिकारी रणधीर मिश्रा, नगर पंचायत अध्यक्ष फुलवंती गौड़ तथा कंपनी प्रबंधन की ओर से पीयूष शुक्ला मौजूद रहे।बैठक के दौरान समाजसेवी सुभाष पाल ने कहा कि बाहर से आने वाले कचरा वाहनों को लंबे समय तक यार्ड में खड़ा रखने के कारण पूरे नगर में दुर्गंध फैल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा कई बार समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।सभासद दीक्षा पटेल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की सुबह भी दुर्गंध इतनी अधिक थी कि लोगों को योगाभ्यास करने में कठिनाई हुई। उन्होंने कहा कि अब केवल लिखित और स्थायी समाधान ही स्वीकार्य होगा।व्यवसायी एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कंपनी के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की। धीरेन्द्र प्रताप ने आरोप लगाया कि कंपनी ने नई मशीनरी और अनापत्ति प्रमाणपत्र से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक डाला के बजाय कोटा में आयोजित की, जिससे स्थानीय लोगों को जानकारी नहीं मिल सकी। उन्होंने कहा कि कंपनी से निकलने वाली दुर्गंध और धूल के कारण क्षेत्र में दमा, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।मनोज शुक्ला ने कहा कि पिछले दो वर्षों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। यदि अब भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा।बैठक के दौरान प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी जे.एन. तिवारी ने निरीक्षण में केवल मामूली दुर्गंध पाए जाने की बात कही, जिस पर लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई। स्थिति को देखते हुए उपजिलाधिकारी विवेक कुमार ने लोगों को शांत कराया।सदर विधायक भूपेश चौबे ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मामले की गंभीर जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी और यदि कंपनी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो उसे बंद कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है।कंपनी प्रबंधन की ओर से पीयूष शुक्ला ने बताया कि दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए अत्याधुनिक स्प्रे सिस्टम और अन्य तकनीकी उपाय लगाए गए हैं। बाहर से आने वाले गीले कचरे का शीघ्र निस्तारण कर दुर्गंध कम करने का प्रयास किया जा रहा है।बैठक के अंत में प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों के बीच एक संयुक्त सहमति पत्र तैयार किया गया, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन, दुर्गंध की स्थायी रोकथाम, कचरा परिवहन में ओवरलोडिंग रोकने तथा निगरानी के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति बनी। इसके बाद 23 जून को प्रस्तावित आंदोलन को निरस्त कर दिया गया।इस अवसर पर सभासद बलबीर, विशाल, अवनीश, दीक्षा पटेल, प्रतिनिधि आमिल बेग, सुगेनी प्रसाद, हनुमान अग्रहरि, पवन शर्मा, ऋषु जायसवाल, संतोष सिंह ‘बबलू’, रमाशंकर, महेश सोनी सहित नगर के सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे।

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