जनता कर्फ्यू के समर्थन में डॉ0 लखन राम जंगली की वनवासी बोली की कविता।
सोनप्रभात/ सोनप्रभात
sonbhadra
1:49 PM, Mar 22, 2020
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Edited by: Ashish Gupta

सोनप्रभात/ सोनप्रभात
(कला एवं साहित्य)
- राखेक ह एतवारी - डॉ0 लखनराम 'जंगली'
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जनता करफू घर घर रहही,राखेक ह एतवारी, कोरोना जाही ना जबले, जंग हमर ह जारी। घरही खाब नहाब एक दिन, कवन पहार ढहावेक ह, रोजै दुखणा ,एक दिना बर करमा उधवा गावेक ह, हाथ धोवाई साफ सफाई , रोजै रहही जारी। अस्पताल में झुठै भीड़ बढावेक नइखै , बिन मतलब के राशन तेल जुटावेक नइखै , भीड़ से बचके,सच जाने बर समाचार सरकारी। खउरा कुकरा भूकै जेतना, चाहे खीस निपोरै, हरहा मरहा बरदा बछिया चाहे जेतना छोरै, बेण छेक के ढाक तोप के,राखेक ह फुलवारी। सेवा मे जेतना भाई हं, उनकर मान बढावेक ह, मन टूटै ना उनकर दउआ, अइसन चाल चलावेक ह, डक्टर कहै करेक ह वोही,तब जाही महमारी। -
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