साइबर ठगों के निशाने पर रेलवे पेंशनर, 31 लाख की ठगी का हुआ खुलासा, दो गिरफ्तार
सोनभद्र। पेंशनधारकों और सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सोनभद्र साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने 31 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में दो आरोपियों को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है।
8:06 PM, Aug 13, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

पेंशनधारकों को निशाना बनाने वाले अंतरराज्यीय साइबर गैंग का खुलासा, 31 लाख की ठगी में दो गिरफ्तार
सोनभद्र। पेंशनधारकों और सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सोनभद्र साइबर क्राइम पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने 31 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में दो आरोपियों को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, एक वाई-फाई राउटर, चार सिम कार्ड और 53 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।पुलिस के अनुसार, 17 जून 2025 को आरोपियों ने पीड़ित को फोन कर खुद को पेंशन विभाग का अधिकारी बताया। आरोपियों ने PPO नंबर में सुधार और मोबाइल नंबर बंद होने का भय दिखाकर पेंशन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर पीड़ित से व्यक्तिगत और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल की।इसके बाद पीड़ित के मोबाइल पर APK फाइल/लिंक भेजकर स्क्रीन शेयरिंग कराई गई और OTP हासिल कर बैंक खातों से करीब 31 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर लिए गए। इसके अलावा फोनपे के माध्यम से एक लाख रुपये तथा 10 लाख रुपये की एफडी भी कराई गई।
रेलवे पेंशनरों का डेटा बनता था निशाना
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह रेलवे के पेंशनधारकों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों का डेटा जुटाकर उन्हें निशाना बनाता था। आरोपी रेलवे के Pension Payment Order (PPO) से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल कर पीड़ितों में भरोसा पैदा करते थे और खुद को रेलवे या रेलवे बोर्ड का अधिकारी बताकर संपर्क करते थे।पुलिस के मुताबिक आरोपी UMEED Portal के RASS Tab पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा हासिल करने के लिए जन्मतिथि का अनुमान लगाकर विवरण खोजते थे। जानकारी मिलने के बाद उसे पीड़ित के सामने प्रस्तुत कर विश्वास कायम किया जाता था। फिर PPO में सुधार, मोबाइल नंबर अपडेट अथवा बंद होने जैसी बातों का डर दिखाकर बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती थी।
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रेलवे कर्मचारियों की मिलीभगत की भी जांच
पुलिस पूछताछ में पवन मंडल और मुकेश मंडल, निवासी झारखंड के नाम डेटा उपलब्ध कराने वालों के रूप में सामने आए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों का डेटा कहां से प्राप्त किया जाता था तथा इसमें रेलवे के किन कर्मचारियों की भूमिका थी।जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
कोई डेटा उपलब्ध कराता था, कोई पेंशनधारकों को फोन करता था, जबकि कुछ लोग बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम एटीएम से निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने का काम करते थे।पुलिस के अनुसार आरोपियों ने धनबाद, समस्तीपुर, हापुड़, संभल और मुंगेर समेत विभिन्न स्थानों पर लाखों रुपये की साइबर ठगी किए जाने की जानकारी दी है। आरोपी रूपक कुमार पर ठगी की रकम एटीएम से निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने में सहयोग करने का आरोप है।
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तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
साइबर क्राइम पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को कोलकाता से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष कुमार शाह (30), निवासी मिर्जा चौकी, थाना साहेबगंज, झारखंड और रूपक कुमार (54), निवासी गोपडीह बांका, थाना चंदना, झारखंड के रूप में हुई है।कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) ऋषभ रुणवाल के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी/सहायक नोडल साइबर हर्ष पाण्डेय के पर्यवेक्षण तथा साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में की गई।
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पुलिस की अपील पुलिस ने पेंशनधारकों और आम लोगों से अपील की है कि पेंशन, PPO नंबर, बैंक खाता या मोबाइल बंद होने के नाम पर फोन करने वाले किसी अनजान व्यक्ति को OTP, ATM PIN, UPI PIN या अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी न दें। किसी अनजान APK फाइल या लिंक को डाउनलोड न करें और किसी के कहने पर मोबाइल की स्क्रीन शेयर न करें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।






