सोनभद्र खनन टेंडर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के LOI जारी करने के आदेश पर लगाई रोक
सोनभद्र खनन टेंडर विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के LOI जारी करने के आदेश पर लगाई रोक
1:36 PM, Jun 13, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Anil Kumar agrahari

सोनभद्र। बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के भूमिधरी खनन पट्टों की ई-नीलामी को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उच्चतम बोली लगाने वाली कंपनियों के पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।दरअसल, 12 जनवरी 2026 को सोनभद्र के विभिन्न खनन क्षेत्रों के लिए ई-नीलामी आयोजित की गई थी। एक खनन पट्टे के लिए कांत कंस्ट्रक्शन ने 1051 रुपये प्रति घन मीटर की सर्वाधिक बोली लगाई थी, जबकि नीलामी का बेस प्राइस 165 रुपये प्रति घन मीटर निर्धारित था। इसके बावजूद प्रशासन ने यह कहते हुए कंपनी की बोली निरस्त कर दी कि उसने आवश्यक एफिडेविट, डिमांड ड्राफ्ट और चालान की हार्ड कॉपी समय से जमा नहीं की।बाद में उक्त पट्टा 207 रुपये प्रति घन मीटर की बोली लगाने वाली मां दुर्गा माइनिंग वर्क्स को आवंटित कर दिया गया। इसी प्रकार दो अन्य खनन पट्टों में 333-333 रुपये प्रति घन मीटर की उच्च बोलियों को निरस्त कर क्रमशः 201 और 202 रुपये प्रति घन मीटर की बोली लगाने वाली कंपनियों को आवंटन दे दिया गया।मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने पर कोर्ट ने इसे नीलामी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता और हेराफेरी का मामला माना। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने जिला प्रशासन द्वारा जारी LOI को रद्द करते हुए 8 मई 2026 को प्रशासन को निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता कांत कंस्ट्रक्शन और रुद्रा एंटरप्राइजेज के पक्ष में नया LOI जारी किया जाए।हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए मां दुर्गा माइनिंग वर्क्स ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है तथा अगली सुनवाई की तिथि 3 अगस्त 2026 निर्धारित की है।साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 8 मई 2026 के आदेश के प्रभाव और उसके तहत जारी किए जाने वाले LOI पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश 3 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगा।अब इस मामले में सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां खनन पट्टों के आवंटन और नीलामी प्रक्रिया की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
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