Sonbhadra : थाना अनपरा की साइबर टीम की त्वरित कार्रवाई, पीड़ित को लौटाए गए 25 हजार रुपये
रेनूसागर कॉलोनी निवासी हरिराम वर्मा के साथ 29 दिसंबर 2024 को एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को उनका रिश्तेदार बताते हुए फोन किया। आरोपी ने अस्पताल में भर्ती होने का झांसा देकर तत्काल पैसों की आवश्यकता बताई और भावनात्मक दबाव बनाकर उनसे कुल 70 हजार रुपये ठग लिए।
anpara
5:54 PM, Apr 28, 2026
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Edited By: Ashish Gupta

सोनभद्र। जनपद में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच थाना अनपरा पुलिस ने सराहनीय कार्य करते हुए ठगी के शिकार एक पीड़ित को राहत पहुंचाई है। पुलिस अधीक्षक सोनभद्र श्री अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) श्री अनिल कुमार के दिशा-निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी पिपरी श्री हर्ष पाण्डेय के पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के अंतर्गत यह सफलता हासिल हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना अनपरा क्षेत्र के रेनूसागर कॉलोनी निवासी हरिराम वर्मा के साथ 29 दिसंबर 2024 को एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को उनका रिश्तेदार बताते हुए फोन किया। आरोपी ने अस्पताल में भर्ती होने का झांसा देकर तत्काल पैसों की आवश्यकता बताई और भावनात्मक दबाव बनाकर उनसे कुल 70 हजार रुपये ठग लिए। घटना के बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने बिना देर किए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया और साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

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मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना अनपरा की साइबर टीम सक्रिय हो गई। टीम ने तकनीकी साक्ष्य जुटाते हुए संबंधित बैंक से समन्वय स्थापित किया और ठगी की गई धनराशि को समय रहते होल्ड करा दिया। इसके बाद विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए होल्ड की गई राशि में से 25 हजार रुपये सफलतापूर्वक पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दिए गए।
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इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह और साइबर हेल्प डेस्क पर तैनात हेड कांस्टेबल आनंद मोहन बिंद की विशेष भूमिका रही, जिनकी तत्परता और सूझबूझ से पीड़ित को आंशिक राहत मिल सकी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शेष धनराशि की वापसी के लिए भी प्रयास जारी हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर भरोसा न करें, विशेषकर जब कोई व्यक्ति खुद को परिचित या रिश्तेदार बताकर पैसे की मांग करे। किसी भी स्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें। यदि साइबर ठगी की आशंका हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को कम किया जा सके।
इस तरह की त्वरित कार्रवाई न केवल पीड़ितों के लिए राहत का कारण बन रही है, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।






