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सोनभद्र : समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे शिक्षक, बच्चे खोल रहे स्कूल का ताला।

7:30 बजे खुलना था विद्यालय, 8:15 तक नहीं पहुंचे शिक्षक, व्यवस्था पर उठे सवाल।

muirpur

10:45 PM, Apr 24, 2026

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Edited by: Ashish Gupta

, Reported By: Babulal Sharma/ Prashant Dubey

सोनभद्र : समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे शिक्षक, बच्चे खोल रहे स्कूल का ताला।

Image: Ai Generated Sonprabhat News

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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

म्योरपुर | सोनभद्र जनपद के म्योरपुर शिक्षा क्षेत्र अंतर्गत नधीरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय झिल्ली महुआ में शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। गुरुवार सुबह विद्यालय के निर्धारित समय 7:30 बजे तक कोई भी शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचा, जिससे बच्चों को स्वयं ही स्कूल खोलने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 8:15 बजे तक भी विद्यालय में कोई शिक्षक मौजूद नहीं था।

सुबह 8 बजे के बाद भी नहीं खुला ताला 

सुबह 8 बजे के बाद भी नहीं खुला ताला 

इस दौरान छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचकर मुख्य द्वार और कक्षा-कक्षों के ताले खोलते दिखाई दिए। यह स्थिति न केवल अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जिम्मेदारी के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है।

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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय की चाभी अक्सर बच्चों को ही सौंप दी जाती है, ताकि वे समय से स्कूल खोल सकें। वहीं शिक्षक प्रायः निर्धारित समय से काफी देर बाद, लगभग 9 बजे तक विद्यालय पहुंचते हैं।

ग्रामीणों का मानना है कि जब शिक्षक स्वयं समय का पालन नहीं कर रहे, तो विद्यार्थियों में अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का विकास कैसे संभव होगा।

बताया जा रहा है कि यह समस्या केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। लगातार मिल रही ऐसी शिकायतों से अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी म्योरपुर, सुनील कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से विद्यालयों में प्रार्थना सभा के समय की फोटो मंगाई जाएगी, जिससे शिक्षकों की उपस्थिति और समयपालन की निगरानी की जा सके।

शिक्षा व्यवस्था में इस प्रकार की अनियमितता एक बार फिर सरकारी विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।

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