सोनभद्र: व्यापार संगठन ने डीएम को सौंपा मांगपत्र, उद्योग-पर्यटन विकास पर दिया जोर
सोनभद्र: व्यापार संगठन ने डीएम को सौंपा मांगपत्र, उद्योग-पर्यटन विकास पर दिया जोर
8:52 PM, Apr 30, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

सोनभद्र, 30 अप्रैल। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर व्यापारियों की विभिन्न समस्याओं और जिले के विकास से जुड़े मुद्दों को उठाया।संगठन के जिलाध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि सोनभद्र चार राज्यों—बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़—की सीमाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट और वेयरहाउसिंग के बड़े अवसर मौजूद हैं। उन्होंने मांग की कि जिले में 600 से 800 एकड़ भूमि उद्योगों के लिए चिन्हित कर लैंड बैंक बनाया जाए। यदि भूमि अधिग्रहण संभव न हो तो लैंड पूलिंग मॉडल अपनाया जाए, जिससे विकास और जनहित के बीच संतुलन कायम हो सके।उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर सोनभद्र चार राज्यों के व्यापारिक प्रवेश द्वार के रूप में विकसित होकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।पर्यटन विकास की अपार संभावनाएंकौशल शर्मा ने कहा कि सोनभद्र प्राकृतिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध जिला है। यहां इको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, होटल-रिसॉर्ट, ट्रैवल सर्विस और स्मारिका बाजार विकसित किए जा सकते हैं।उन्होंने मुक्खा फॉल, धनरौल बांध, विजयगढ़ किला, कंडाकोट पहाड़ी और फॉसिल्स पार्क को पर्यटन के प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि यहां इको-फ्रेंडली कॉटेज, बर्ड वॉचिंग, मेडिटेशन स्पॉट और नेचर ट्रेल विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही स्थानीय आदिवासी युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा सकता है।नगर अध्यक्ष प्रशांत जैन ने कहा कि एडवेंचर टूरिज्म के तहत ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग, बोटिंग, कैंपिंग और बोनफायर जैसी गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।कृषि और फूड प्रोसेसिंग पर जोरजिला कोषाध्यक्ष शरद जायसवाल ने कहा कि जिले में कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग की भी अपार संभावनाएं हैं। यहां गेहूं, दालें और चावल प्रमुख उत्पाद हैं। जिले में ऑर्गेनिक खेती, हर्बल उत्पाद, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउसिंग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर क्षेत्र का विकास किया जा सकता है।जिला उपाध्यक्ष राजेश जायसवाल और प्रदीप जायसवाल ने कहा कि क्लस्टर मॉडल अपनाकर फूड प्रोसेसिंग, ऑर्गेनिक खेती और हर्बल उत्पादों को जोड़कर मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार किया जा सकता है।बस स्टैंड संचालन का मुद्दा भी उठाटीपू अली और नागेंद्र मोदनवाल ने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से रोडवेज बस स्टैंड बनने के बावजूद बसों का संचालन अभी भी फ्लाईओवर के नीचे से किया जा रहा है। यह मुद्दा पिछले एक वर्ष से उद्योग बंधु की बैठकों में उठाया जा रहा है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।बैठक में कौशल शर्मा, प्रशांत जैन, शरद जायसवाल, राजेश जायसवाल, राजू जायसवाल, सिद्धार्थ सांवरिया, प्रदीप जायसवाल, टीपू अली, कृष्णा सोनी, नागेंद्र मोदनवाल, यशपाल सिंह, विनय जायसवाल, दिनेश सिंह, पंकज कनोडिया, अभिषेक साहू, अभिषेक गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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