फिरौती मांगने और एससी/एसटी एक्ट के मामले में चार दोषियों को तीन-तीन साल की सजा
फिरौती मांगने और एससी/एसटी एक्ट के मामले में चार दोषियों को तीन-तीन साल की सजा
8:47 PM, Jun 29, 2026
Share:
Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

साढ़े दस वर्ष पुराने मामले में विशेष न्यायालय का फैसला, चारों दोषियों पर 74 हजार रुपये का कुल अर्थदंड भी लगाया
सोनभद्र, 29 जून। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट गोविंद मोहन की अदालत ने सोमवार को करीब साढ़े दस वर्ष पुराने अपहरण, फिरौती मांगने और अनुसूचित जाति के व्यक्ति को जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने के मामले में चार आरोपितों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दो दोषियों पर 16-16 हजार रुपये तथा दो अन्य दोषियों पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का भी आदेश दिया है।अभियोजन के अनुसार शाहगंज थाना क्षेत्र के आशाताली गांव निवासी दिनेश कुमार ने 13 नवंबर 2015 को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि उनके पिता 11 नवंबर को घर से निकले थे। अगले दिन बाला उर्फ शंकर सरन ने दूसरे के मोबाइल से फोन कर बताया कि उनके पिता शक्तेशगढ़ (मिर्जापुर) में हैं। जब परिजनों ने दिए गए नंबर पर संपर्क किया तो आरोपितों ने कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए 80 हजार रुपये की फिरौती मांगी और रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी।शाहगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की।
जांच के दौरान बाला उर्फ शंकर सरन के अलावा जोखन हरिजन, धर्मेंद्र पटेल और दिलीप कुमार पटेल की संलिप्तता भी सामने आई। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने चारों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने चारों आरोपितों को दोषी ठहराया। अदालत ने बाला उर्फ शंकर सरन एवं जोखन हरिजन पर 16-16 हजार रुपये तथा धर्मेंद्र पटेल एवं दिलीप कुमार पटेल पर 21-21 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें
जुर्माना जमा न करने पर प्रत्येक दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता सी. शशांक शेखर कात्यायन ने प्रभावी पैरवी की।






