साइबर ठगी के बैंक खातों का संचालन करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, खातों में मिले ₹3 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन
साइबर ठगी के बैंक खातों का संचालन करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, खातों में मिले ₹3 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन
9:01 PM, Jul 29, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

सोनभद्र, 29 जुलाई। अनपरा थाना पुलिस ने साइबर ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों के संचालन से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और ₹2,500 नकद बरामद किए हैं। जांच के दौरान संबंधित बैंक खातों में ₹3 करोड़ से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है।पुलिस अधीक्षक सोनभद्र अभिषेक वर्मा के निर्देशन में साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अनिल कुमार के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी पिपरी हर्ष पाण्डेय के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक अनपरा प्रणय प्रसून श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की।पुलिस के अनुसार, थाना अनपरा में दर्ज मुकदमा संख्या 162/2026 में विवेचना के दौरान साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों से संबंधित साक्ष्य मिले थे। इसके बाद मुखबिर की सूचना पर थाना शक्तिनगर क्षेत्र के चिल्काडांड बाजार में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय कुमार अग्रहरी (35), पुत्र सुभाष चन्द अग्रहरी और मुकेश कुमार गुप्ता (30), पुत्र लालचन्द गुप्ता के रूप में हुई है। दोनों चिल्काडांड, थाना शक्तिनगर, जनपद सोनभद्र के निवासी हैं।पुलिस के मुताबिक पूछताछ और साक्ष्य संकलन के दौरान पता चला कि आरोपियों ने एक से अधिक बैंक खातों में इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा सक्रिय कर उन्हें साइबर अपराधियों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया था। जांच में इन खातों के माध्यम से ₹3 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिली है।आरोपियों के कब्जे से एक आईफोन, एक आईक्यूओओ 12 मोबाइल फोन और ₹2,500 नकद बरामद किए गए हैं। बरामद सामान को कब्जे में लेकर मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। गिरफ्तार आरोपियों को नियमानुसार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक अशोक सिंह और कांस्टेबल सुशील राजपूत शामिल रहे।पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग की सुविधा किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध न कराएं। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति भी साइबर अपराध में कानूनी रूप से उत्तरदायी हो सकता है। साइबर अपराध की सूचना तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर देने की अपील की गई है।
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