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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ममता बनर्जी का 15 साल का किला ढहा

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ममता बनर्जी का 15 साल का किला ढहा

3:48 PM, May 4, 2026

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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ममता बनर्जी का 15 साल का किला ढहा
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क



: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पूर्ण परिणाम – भाजपा ने 193 सीटों पर बढ़त के साथ इतिहास रच दिया, टीएमसी 109 सीटों पर सिमटी, ममता बनर्जी की भवानीपुर में करारी जीत लेकिन मंत्रिमंडल ढेर। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
कोलकाता, 4 मई 2026: पश्चिम बंगाल की जनता ने आज एक ऐसा फैसला सुनाया जो देश की राजनीति की दशा और दिशा बदलने वाला है। पाँच दशक के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की सत्ता पर कब्ज़ा जमाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का 15 साल पुराना किला ध्वस्त हो गया। चुनाव आयोग के अंतिम रुझानों के अनुसार, 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 193 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी महज़ 109 सीटों तक सिमट गई। बहुमत का जादुई आँकड़ा 148 था, लेकिन भाजपा ने उसे बहुत पीछे छोड़ दिया। राज्य में 92.47 प्रतिशत के रिकॉर्ड मतदान ने इस सत्ता-विरोधी लहर को पुख़्ता कर दिया।
दिन का सबसे रोमांचक मुक़ाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में देखने को मिला। सुबह के शुरुआती रुझानों में वे लगातार पीछे चल रही थीं, दूसरे राउंड में वे 1,558 वोटों से पिछड़ गईं। तीसरे राउंड में वापसी करते हुए उन्होंने सिर्फ 898 वोटों की बेहद मामूली बढ़त हासिल की। इसके बाद हर राउंड के साथ अंतर बढ़ता गया और अंततः वे 17,371 वोटों के अंतर से जीत गईं। हालाँकि यह जीत उनके राजनीतिक करियर की सबसे कठिन जीतों में से एक बन गई। दूसरी ओर, नंदीग्राम से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने एकतरफ़ा बढ़त बनाकर अपनी सीट सुरक्षित रखी।
सिर्फ ममता बनर्जी ही नहीं, पूरी टीएमसी सरकार मतदाताओं के गुस्से की शिकार हुई। सरकार के 12 से अधिक मंत्री अपनी-अपनी सीटों पर हार का सामना करते दिखे। राज्य के मंत्री उदयन गुहा और शशि पांजा जैसे दिग्गज नेता भी अपनी सीटें नहीं बचा पाए। इस चुनावी नतीजे ने साफ कर दिया कि जनता पूरी तरह से बदलाव चाहती थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऐतिहासिक हार के पीछे पाँच बड़े कारण रहे। पहला, 15 साल की सत्ता-विरोधी लहर, ठीक वैसे ही जैसे 2011 में 34 साल पुरानी वाम सरकार के खिलाफ उठी थी। दूसरा, करोड़ों रुपये का शिक्षक भर्ती घोटाला, जिसने युवाओं और शिक्षित वर्ग में टीएमसी के प्रति गहरी नाराज़गी पैदा की। तीसरा, बेरोज़गारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने ज़मीन पर सरकार की विफलता को उजागर किया। चौथा, राज्य की 3.16 करोड़ महिला मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर भाजपा के पक्ष में मतदान किया। पाँचवाँ, सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही नाराज़गी भी टीएमसी के खिलाफ गई।
प्रतिक्रियाओं का दौर भी दिनभर जारी रहा। ममता बनर्जी ने कहा, “सब कुछ ग़लत रिपोर्ट किया जा रहा है,” जबकि शुभेंदु अधिकारी ने इसे “जनता का स्पष्ट जनादेश” बताया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि “टीएमसी के खिलाफ भारी मतदान तो हुआ, लेकिन विपक्षी वोटों के बँटने से हम इसका पूरा फायदा नहीं उठा सके।”
अब राज्य के सामने सबसे बड़ा सवाल नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर है—क्या कमान शुभेंदु अधिकारी को मिलेगी या भाजपा कोई नया चेहरा सामने लाएगी? यह जनादेश सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है; यह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट भी है।

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