यूपी में पंचायत चुनाव कब ? जानें हाईकोर्ट ने क्या कहा... UP Panchayat Election
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई 2026 तक है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत इनका कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता, जिससे समय पर चुनाव कराना अनिवार्य हो गया है। यही कारण है कि इस मामले में न्यायालय की सक्रियता बढ़ गई है।
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6:01 PM, Apr 28, 2026
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Edited By: Ashish Gupta , Reported By: Social Desk

Photo : Sonprabhat News
प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चुनाव कार्यक्रम जारी करने की मांग में दाखिल नई याचिका को पहले से लंबित इम्तियाज हुसैन की याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश दिया गया है। इससे अब दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी और कोर्ट एक समग्र निर्णय दे सकेगा।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने बताया कि इसी मुद्दे पर एक अन्य याचिका पहले से विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 30 अप्रैल को तय है। इस पर कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को एक साथ जोड़ने का आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि अब इस मुद्दे पर संयुक्त रूप से सुनवाई की जाएगी।
याचिका में उठाई गई मुख्य मांग
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इम्तियाज हुसैन की याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम समय से पहले घोषित किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव 26 मई 2026 या उससे पहले संपन्न कराए जाएं, ताकि संवैधानिक प्रावधानों का पालन हो सके और किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।

आयोग से कोर्ट के सवाल
हाईकोर्ट ने पहले ही राज्य निर्वाचन आयोग से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि क्या आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(ई) के तहत निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराने की स्थिति में है या नहीं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देकर अगली सुनवाई से पहले रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाए, हालांकि इस पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
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कार्यकाल समाप्ति से बढ़ा दबाव
प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल तेजी से समाप्त होने की ओर है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, जबकि जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई 2026 तक है। संवैधानिक प्रावधानों के तहत इनका कार्यकाल बढ़ाया नहीं जा सकता, जिससे समय पर चुनाव कराना अनिवार्य हो गया है। यही कारण है कि इस मामले में न्यायालय की सक्रियता बढ़ गई है।
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राजनीतिक संकेत भी तेज
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पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। मंत्री ओपी राजभर ने भी अदालत की कार्यवाही के बाद संकेत दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार भी अब इस दिशा में गंभीरता से कदम बढ़ाने की तैयारी में है।
“लोअर कोर्ट” शब्द पर हाईकोर्ट की आपत्ति
इसी बीच हाईकोर्ट ने न्यायिक शब्दावली को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान “लोअर कोर्ट” शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह शब्द संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है और इसके स्थान पर “ट्रायल कोर्ट” या संबंधित अदालत के नाम का उपयोग किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सखावत बनाम अन्य मामला का भी उल्लेख किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी भी अदालत को “निचली अदालत” कहना संवैधानिक भावना के खिलाफ है। इसके साथ ही रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया गया है कि आधिकारिक दस्तावेजों में सही और सम्मानजनक शब्दावली का ही प्रयोग किया जाए।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को प्रस्तावित है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि उस दिन राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट स्थिति बतानी होगी और संभवतः कोर्ट की ओर से कोई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किया जा सकता है।






