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कमीशन खोरी के चक्कर में गर्भवती महिला को एम्बुलेंस कर्मियों द्वारा निजी अस्पताल में भर्ती कराने के मामले ने पकड़ा तूल।

बभनी – सोनभद्र / उमेश कुमार – सोन प्रभात

  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बभनी के डॉक्टरों द्वारा इलाज हेतु जिला अस्पताल सोनभद्र के लिए किया गया था रिफर।

बभनी । प्रदेश सरकार जहाँ स्वास्थ व्यवस्था को बेहतर करने और लोगों को इसका लाभ पहुँचाने के लिए करोड़ो रूपए खर्च कर सभी अस्पतालों को सुविधाओं से लैस कर रही है वही स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कुछ लालची व कमीशन खोर कर्मचारियों की सजा इन दिनों मरीजों व गर्भवती महिलाओं व परिजनों को झेलनी पड़ रही है।जो कुछ बिचौलिए कर्मचारियों के वजह से जहाँ मोटी रकम चुकानी पड़ रही है वही इन इक्के दुक्के कर्मचारियों के वजह से पूरे स्वास्थ्य महकमे को लोग अलग नजरों से देखते हैं।लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था से उठ जाता है।और निजी अस्पतालों के चक्कर में फँस जाते हैं। और कुछ कर्मचारी लालच के चक्कर में उनकी बलि चढ़ा देते हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार सविता देवी निवासी मुड़ीसेमर विण्ढमगंज बीते 16 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने पर सीएचसी बभनी में भर्ती कराया जिसके स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया ।जिसे लेकर एम्बुलेंस जिला अस्पताल के लिए गई।


वही गर्भवती महिला के पति बलिराम ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल पहुँचने पर एम्बुलेंस कर्मी व आशा ने उनसे कहा कि जिला अस्पताल में तुम्हारे पत्नी का बेहतर इलाज नही हो पाएगा रिस्क लेना ठीक नही।जबतक मैं कुछ सोच और समझ पाता एम्बुलेंस कर्मी द्वारा एक आटो बुलाकर हमें निजी अस्पताल में भेज दिया। और बताया कि मैं पल्लेदारी का कार्य करता हूँ। ऐसे में मेरे पास फीस चुकाने के लिए भी रूपये नही थे।जिसे चुकाने के लिए ब्याज पर पैसा लेना पड़ा।
इस सम्बंध में एम्बुलेंस संचालन करने वाली कम्पनी के प्रोग्राम मैनेजर से जब मीडिया कर्मी द्वारा पूछा गया तो बताया कि मामला संज्ञान में आया है। ईएमटी व चालक को तत्काल एंबुलेंस चलाने पर रोक लगा दिया गया है।कहा कि जाँच के लिए लखनऊ विभाग को ईमेल द्वारा सूचना दे दी गई है।जाँच के बाद जो भी दोषी पाया जाता है।उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।


वही सूत्रों के अनुसार निजी अस्पतालों में मरीज भेजने पर भेजने वाले कर्मियों को मोटी कमीशन प्राप्त होती है जिसके लालच में कुछ लालची कमीशन खोर कर्मी अपने लाभ के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजकर बलि का बकरा बनाते है और उनसे प्राप्त मोटी कमाई मिल बाटकर खाते है।और परिजन अपने जिन्दगी भर की कमाई इन बिचौलियों के चक्कर में गवा देते हैं और कुछ लोग कर्ज में डूब जाते है।

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