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गांधी जी के सपनों को साकार करने वाले बुनकर आज उपेक्षित।

विंध्यनगर – सिंगरौली / सुरेश गुप्त “ग्वालियरी” – सोन प्रभात

एक समय था जब जिला झांसी ( उत्तर प्रदेश) का तहसील मऊ रानी पुर का एक छोटा सा कस्बा रानी पुर गुलजार रहता था,बाहर से आने वाले व्यापारियों की भीड़,हथ करघाओं की ध्वनि तथा बाजार की चहल पहल का एक अलग ही नजारा देखने को मिलता था, सस्ता, टिकाऊ!! ब्रांडेड कपड़ों को शिकस्त देता हुआ यहां का रानीपुर टेरीकॉट एवम जनता साड़ी ने देश के अनेक हिस्सों में धूम मचाया है!! तीन हजार से अधिक बुनकरों तथा सात हजार हथ करघाओ द्वारा दो लाख मीटर प्रति माह से अधिक पेंट शर्ट का उत्पादन करने वाला यह क्षेत्र आज मात्र तौलिया व चादर निर्माण में सिमट कर रह गया है!! महात्मा गांधी का स्वदेशी व कुटीर उद्योग के सपनो को साकार करने वाला क्षेत्र के बुनकर भुख मरी के कगार पर खड़े है ,यहां के व्यापारियों ने पावर लूम लगाकर ब्रांडेड कपड़ों को भी मात दे कर एक गुणवत्ता युक्त उत्पाद भी दिया परंतु शासकीय उपेक्षा तथा महंगी बिजली ने यहां के वस्त्र उद्योग को प्रति स्पर्धा से बाहर कर दिया।

धागे के पुराने व्यापारी प्रवीण गुप्ता तथा टेरीकॉट व्यापारी बबलू नौगरिया का कहना है यदि शासन व प्रशासन उद्योग के प्रति उदार रवैया अपनाए तथा सस्ती बिजली एवम आर्थिक रूप से सहयोग करे तो यहां का वस्त्र उद्योग फिर पटरी पर दौड़ सकता है!!
अब देखिए कब फिर यहां के बुनकरों के हाथ की जादूगरी देखने को मिलती है,कहा जाता है यहां के बने वस्त्र के आगे कोई टिक नही पाता था!!

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