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देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है-संपादकीय लेख

देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।

हमारा तिरंगा किसी एक दिन का मोहताज़ नहीं है,
उठी थी जैसी सन सत्तावन में अब वैसी परवाज़ नहीं है,
आज दिखेगी देशभक्ति फिर मूक बनेंगे सारे सब,
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।

हाथ में तिरंगा लेकर शान से लहराएंगे,
कल देखेंगे जमीं पे उसको फिर हाथ ना लगाएंगे,
गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस में बनेंगे देशभक्त सब,
भ्रष्टाचारी बनने हेतु फिर से आगे आ जायेंगे।
कैसे कह दूं इस देश में भ्रष्टाचारी राज नहीं है,
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।

ब्रिटेन में घुस कर गोली मारे ऐसे वीर उधम सिंह थे,
मौत के आगे कभी ना हारे ऐसे वीर भगत सिंह थे,
आज़ाद,मंगल पांडे और बोस के जैसे नेता थे,
शेरों जैसे जिगर लिए जो मणिकर्णिका,बिस्मिल थे।
मर मिटने वाला नेता हो कोई ऐसी किसी में बात नहीं है,
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।

सच्चे सपूत अब वही हैं जो अब सीमा पर तैनात हैं,
डटे रहना काम है उनमें कहां डरने वाली बात है,
राजनेता तो बस कुर्सी के लिए ऊमर निकाल देता है,
कोई मरे जो देश की खातिर कहां किसी की औकात है।
वीरों को नमन करने को मेरे पास अल्फाज़ नहीं हैं,
देश के लिए उठे जो हर दिन अब वैसी आवाज नहीं है।

-अनिल गुप्ता

 

 

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